यूपी पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल
लखनऊ। दीपावली पर्व के दौरान उत्तर प्रदेश में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पुलिस का दावा चाक-चौबंद होने का था, लेकिन बीते तीन दिनों में हुई पांच गोलीकांड और छह हत्याएं इसके विपरीत दिखा रही हैं। लखनऊ से कानपुर देहात, गोंडा और हरदोई तक बदमाशों ने खुलेआम गोलियों की बौछार की और लाठी-डंडे भी जमकर चले।
तीन दिनों में भयावह वारदातें
कानपुर देहात: दीपावली पर हत्या
कानपुर देहात जिले के गजनेर थाना क्षेत्र में दीपावली की रात 24 वर्षीय गौरव अवस्थी उर्फ शिबू को गोली मारकर मौत के घाट उतार दिया गया।
लखनऊ: अधिवक्ता पर हमला
ठाकुरगंज क्षेत्र में रहने वाले अधिवक्ता दीपेंद्र सिंह को गोली मारकर गंभीर रूप से घायल कर दिया गया।
दुबग्गा: गोलीबारी में घायल
शाहपुर भमरौली गांव में रहने वाले असलम को बदमाशों ने गोली मारकर घायल किया।
रेवतापुर गांव: झालर लगाने को लेकर हमला
पीजीआई थाना क्षेत्र के वृन्दावन योजना के रेवतापुर गांव में दीपावली की झालर लगाने के विवाद में अनुज पर गोलियां चलाकर हमला किया गया।
ठाकुरगंज: पुरानी रंजिश में गोलीबारी
ठाकुरगंज क्षेत्र में 20 वर्षीय उमेश को सलीम कबाड़ी के बेटे शाहरुख ने गोली मार दी, इलाके में दहशत फैल गई।
गोंडा: घरेलू हत्या
नगर कोतवाली इलाके में संदीप ने अपनी 58 वर्षीय मां कांति देवी की बेरहमी से हत्या कर दी।
हरदोई: बेकाबू अपराध
बेनीगंज थाना क्षेत्र के बसहरा गांव में परशुराम सिंह उर्फ पप्पू की हत्या की गई। कोतवाली देहात क्षेत्र के चरौली गांव में अनुप ने अपनी गर्भवती पत्नी को पीट-पीटकर मौत के घाट उतार दिया।
कानून-व्यवस्था पर उठ रहे सवाल
तीन दिनों के भीतर हुई ये वारदातें साफ बयां कर रही हैं कि बदमाशों को पुलिस का खौफ नहीं रहा। गोलियों और घरेलू हिंसा की ये घटनाएं उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था की स्थिति पर गंभीर सवाल उठाती हैं। दीपावली जैसे पवित्र पर्व पर हुई इन हिंसक वारदातों से यह स्पष्ट हो गया है कि उत्तर प्रदेश में सुरक्षा व्यवस्था और पुलिस की तत्परता पर अब गंभीर समीक्षा की जरूरत है।





