मेदांता अस्पताल पर गंभीर लापरवाही के आरोप

    1
    0

    इलाज के नाम पर नाबालिग के पैर की हालत बिगड़ी, परिजन बोले— डॉक्टरों ने की बड़ी गलती
    परिजनों की शिकायत पर भी अस्पताल प्रशासन ने नहीं की कोई कार्रवाई

    लखनऊ। राजधानी लखनऊ के नामी निजी अस्पताल मेदांता पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगे हैं। परिजनों ने दावा किया है कि अस्पताल में भर्ती कराए गए एक नाबालिग बच्चे का इलाज गलत तरीके से करने के कारण उसके पैर की हालत बेहद खराब हो गई। वहीं, आरोप है कि शिकायत के बावजूद अस्पताल प्रशासन ने कोई कदम नहीं उठाया।

    इलाज के लिए कराया था भर्ती, बिगड़ी तबीयत

    परिजनों के मुताबिक, उन्होंने अपने नाबालिग बच्चे को पैर में दर्द की शिकायत के बाद लखनऊ स्थित मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया था। डॉक्टरों ने इलाज का भरोसा दिया और कहा कि सब कुछ सामान्य है। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल प्रशासन और डॉक्टरों ने अपनी मर्जी से बच्चे पर कई तरह के उपचार किए, जिसके बाद बच्चे के पैर की हालत और बिगड़ गई।

    ALSO READ:ललितपुर में माताटीला स्टेशन पर हादसा — निजी कंपनी के टेक्नीशियन की करंट लगने से मौत, परिजनों ने लगाया लापरवाही का आरोप, कार्रवाई और मुआवजे की मांग को लेकर प्रदर्शन

    डॉक्टरों की लापरवाही से बिगड़ी स्थिति

    परिजनों ने बताया कि इलाज के दौरान डॉक्टरों ने बिना पूरी जांच किए बच्चे को दवाएं दीं और पैर में गलत तरीके से पट्टी बाँध दी। कुछ ही समय में बच्चे का पैर सूज गया और हालत गंभीर हो गई। परिजनों ने जब डॉक्टरों से जवाब मांगा तो उन्हें यह कहकर टाल दिया गया कि सब सामान्य है।

    पीजीआई ले जाकर बचाई बच्चे की जान

    बच्चे की स्थिति लगातार बिगड़ती देख परिजनों ने आनन-फानन में मेदांता अस्पताल से डिस्चार्ज लेकर बच्चे को पीजीआई (PGI) ले जाया, जहाँ डॉक्टरों ने बताया कि पैर की हालत गंभीर है और तुरंत इलाज शुरू करना पड़ा। परिजनों का कहना है कि अगर देर होती तो बच्चे की जान पर भी बन सकती थी।

    अस्पताल प्रशासन पर लापरवाही के आरोप

    परिजनों का कहना है कि जब उन्होंने पूरे मामले की शिकायत मेदांता अस्पताल प्रशासन से की तो किसी ने ध्यान नहीं दिया। शिकायत के बाद भी अस्पताल ने न तो डॉक्टरों से जवाब तलब किया और न ही किसी तरह की जांच शुरू की।परिजनों ने कहा कि वे अब इस मामले को उच्च अधिकारियों और स्वास्थ्य विभाग तक ले जाएंगे ताकि डॉक्टरों की लापरवाही पर कार्रवाई हो सके।

    अस्पताल प्रशासन का पक्ष

    मेदांता अस्पताल प्रशासन की ओर से इस मामले पर आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। हालांकि, अस्पताल सूत्रों ने बताया कि “इलाज में किसी भी प्रकार की लापरवाही नहीं बरती गई। जो भी उपचार किया गया, वह परिजनों की सहमति से किया गया था।”

    स्वास्थ्य सेवाओं पर उठे सवाल

    इस घटना ने एक बार फिर निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली और जवाबदेही पर सवाल खड़े कर दिए हैं। लगातार सामने आ रहे ऐसे मामलों से मरीजों और उनके परिजनों का भरोसा डगमगाता जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि अस्पतालों को पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने की जरूरत है ताकि मरीजों के साथ इस तरह की घटनाएँ दोबारा न हों।

    मुख्य बिंदु एक नज़र में

    लखनऊ के मेदांता अस्पताल पर परिजनों ने लगाया लापरवाही का आरोप

    नाबालिग बच्चे के पैर की हालत बिगड़ी, परिजनों ने कहा— डॉक्टरों की गलती

    हालत खराब होने पर बच्चे को पीजीआई ले जाकर कराया गया भर्ती

    शिकायत के बाद भी अस्पताल प्रशासन ने नहीं की कोई कार्रवाई

    अस्पताल ने कहा— “इलाज परिजनों की सहमति से किया गया

    LEAVE A REPLY

    Please enter your comment!
    Please enter your name here