उत्तर प्रदेश सरकार बेटियों की शिक्षा को और मजबूत करने की दिशा में एक नई पहल की तैयारी में है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर ऐसी योजना पर काम शुरू हुआ है, जिसके तहत अगर किसी स्कूल या कॉलेज में दो सगी बहनें पढ़ रही हैं, तो दूसरी बेटी की ट्यूशन फीस माफ की जा सकती है।इस योजना में दो रास्ते खुले रखे जाएंगे।
पहला, संबंधित निजी शैक्षिक संस्थानों से अपील की जाएगी कि वे खुद एक छात्रा की फीस माफ करें। दूसरा, यदि निजी स्कूल या कॉलेज ऐसा करने से इनकार करते हैं, तो सरकार उनकी फीस प्रतिपूर्ति करेगी। इसका मकसद आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की बेटियों की पढ़ाई बीच में न रुके।दरअसल, कोविड आपदा के दौरान प्रभावित परिवारों के बच्चों के लिए चलाई गई मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना के समय सीएम योगी ने यह विचार रखा था।
उस दौरान सर्वे की प्रक्रिया भी शुरू हुई थी, लेकिन चुनाव आचार संहिता के चलते इसे रोकना पड़ा। अब आचार संहिता हटने के बाद एक बार फिर इस योजना को अमल में लाने की तैयारी तेज कर दी गई है।शासन के वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक, प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पहले से ही बालिकाओं की पढ़ाई मुफ्त है। इसके अलावा शिक्षा का अधिकार (RTE), छात्रवृत्ति और फीस प्रतिपूर्ति योजनाओं के जरिए बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं को लाभ मिल रहा है। इसके बावजूद जो बेटियां इन योजनाओं के दायरे से बाहर रह जाती हैं, खासतौर पर निजी स्कूलों और कॉलेजों में पढ़ने वाली जरूरतमंद छात्राएं, उन्हें इस नई व्यवस्था के तहत प्राथमिकता दी जाएगी।
जल्द तय होंगी शर्तें और प्रक्रिया
पिछले महीने सीएम के प्रमुख सचिव संजय प्रसाद की अध्यक्षता में शिक्षा विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक हुई थी, जिसमें योजना के क्रियान्वयन को लेकर मंथन किया गया।
चूंकि प्रदेश में बेसिक, माध्यमिक, उच्च, तकनीकी और व्यावसायिक शिक्षा के अलग-अलग विभाग हैं, इसलिए एक सिंगल विंडो सिस्टम और नोडल विभाग तय करने पर सहमति बनी।इस क्रम में महिला कल्याण विभाग को नोडल विभाग बनाए जाने का प्रस्ताव उच्च स्तर पर भेजा गया है। विभाग आय सीमा, पात्रता शर्तें, बजट की जरूरत और अन्य बिंदुओं पर रिपोर्ट तैयार करेगा। इसके बाद योजना को अंतिम रूप देकर लागू किया जाएगा।





