करोड़ों की ठगी के 4 दिन बाद भी पुलिस खामोश, गरीब किसान दर-दर भटकने को मजबूर
लखनऊ। लखनऊ के पारा थाना क्षेत्र अंतर्गत मोहान रोड स्थित शकुंतला मिश्रा विश्वविद्यालय परिसर के बैंक ऑफ बड़ौदा ब्रांच से जुड़े कथित घोटाले ने अब गंभीर मोड़ ले लिया है। दर्जनों पीड़ितों ने थाने पहुंचकर लिखित तहरीर दी, लेकिन आरोप है कि पुलिस अब तक एफआईआर दर्ज करने से बचती नजर आ रही है।
FIR की मांग को लेकर थाने पर पहुंचे पीड़ित
घोटाले के सामने आने के चार दिन बाद भी पीड़ित अपनी जीवन भर की जमा पूंजी के लिए भटकने को मजबूर हैं। थाने पहुंचे पीड़ितों का कहना है कि वे लगातार पुलिस से मुकदमा दर्ज कराने की गुहार लगा रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
करोड़ों की ठगी, फिर भी पुलिस की चुप्पी पर सवाल
पीड़ितों ने आरोप लगाया कि करोड़ों रुपये के इस घोटाले पर पुलिस की चुप्पी बेहद चौंकाने वाली है। कानून व्यवस्था को लेकर बड़े-बड़े दावे करने वाली पुलिस, इतने बड़े आर्थिक अपराध पर भी मौन साधे बैठी है, जिससे पीड़ितों में भारी नाराजगी है।
200 से ज्यादा लोगों ने की ऑनलाइन शिकायत
अब तक इस कथित बैंक घोटाले को लेकर 200 से अधिक लोग ऑनलाइन शिकायत दर्ज करा चुके हैं। बावजूद इसके, जमीनी स्तर पर पुलिस की कार्रवाई न होने से सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
काकोरी केस में FIR, यहां क्यों नहीं?
पीड़ितों का सवाल है कि जब काकोरी बैंक घोटाले में तत्काल एफआईआर दर्ज हुई, तो फिर इसी तरह के इस घोटाले में पुलिस कार्रवाई से क्यों कतरा रही है? क्या कानून सबके लिए समान नहीं है?
गरीब किसान बने निशाना, शिक्षित वर्ग बचा
घोटाले के शिकार लोगों में अधिकांश गरीब किसान बताए जा रहे हैं, जिन्होंने एलडीए से मुआवजे में मिली रकम बैंक में जमा की थी। पीड़ितों का दावा है कि यह सोची-समझी साजिश थी, जिसमें खास तौर पर किसानों और ग्रामीण पृष्ठभूमि के लोगों को निशाना बनाया गया।
आरोप है कि शिक्षित और जागरूक लोग इस जाल में नहीं फंसे, जिससे घोटाले की योजना पर और सवाल उठते हैं।
आपराधिक साजिश, फिर भी जांच से बाहर?
पीड़ितों का कहना है कि यह सिर्फ बैंकिंग लापरवाही नहीं, बल्कि एक संगठित आपराधिक साजिश है। इसके बावजूद मामला अभी तक पुलिस जांच के दायरे से बाहर रखा गया है, जो पीड़ितों के साथ खुला अन्याय है।
अब आंदोलन की चेतावनी
पीड़ितों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द से जल्द एफआईआर दर्ज कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई, तो वे बड़े आंदोलन और उच्च अधिकारियों से शिकायत करने को मजबूर होंगे


