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“बेटियां जिम्मेदारी नहीं, राष्ट्र की शक्ति हैं— राष्ट्रीय बालिका दिवस पर अमित शाह का संदेश।”

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राष्ट्रीय बालिका दिवस पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शनिवार को देशवासियों को शुभकामनाएं एवं बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह दिन इस बात का प्रतीक है कि बेटियां सिर्फ समाज की जिम्मेदारी नहीं हैं, बल्कि राष्ट्र को आगे बढ़ाने के लिए सबसे बड़ी शक्ति हैं।

अमित शाह ने वीरांगनाओं के शौर्य को किया नमन-

केंद्री ग्रह मंत्री अमित शाह ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म ‘X’ पर लिखा, ‘सभी को ‘राष्ट्रीय बालिका’ दिवस की शुभकामनाएं। राष्ट्रीय बालिका दिवस इस बात का प्रतीक है कि बेटियां सिर्फ हमारी जिम्मेदारी नहीं हैं, बल्कि सच्ची ताकत हैं। रानी लक्ष्मीबाई, रानी वेलु नचियार, मूला गभरू और प्रीतिलता वाडेदार के शानदार उदाहरण हर भारतीय के दिल को गर्व और प्रेरणा से भर देते हैं।”

सशक्त महिलाएं, सशक्त भारत: महिला-नेतृत्व वाले विकास पर जोर-

ग्रह मंत्री ने आगे यह भी कहा कि मोदी सरकार की महिला विकास की योजनाओं ने नारी शक्ति को विकास का केंद्र बनाया है। उन्होंने कहा कि आज महिलाएं देश की प्रगति का नेतृत्व कर रही हैं और हर क्षेत्र में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रही हैं।

बेटियों से बनती है राष्ट्र की पहचान: योगी आदित्यनाथ-

इस अवसर पर उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ ने भी राष्ट्रीय बालिका दिवस पर शुभकामनाएं दीं। उन्होंने X पर लिखा “आज राष्ट्रीय बालिका दिवस’ के अवसर पर सभी माताओं-बहनों और भारत के बेटियों को हार्दिक बधाई दी व राष्ट्र निर्माण में उनके संघर्ष, समर्पण, और सफलता का किया अभिनंदन। बेटियां वरदान हैं, हमारा अभिमान हैं और राष्ट्र की पहचान हैं।”

सुरक्षा, शिक्षा और स्वावलंबन— सरकार की तीन प्राथमिकताएं-

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि डबल इंजन की सरकार मातृशक्ति की सुरक्षा, सम्मान, शिक्षा और स्वावलंबन के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। उन्होंने यह भी कहा कि बेटियां आज हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा और परिश्रम से नए प्रतिमान स्थापित कर रही हैं।

24 जनवरी: राष्ट्रीय बालिका दिवस, बेटियों के सम्मान का दिन-

भारत में बालिकाओं के अधिकारों, शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, और समग्र कल्याण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से हर साल 24 जनवरी को राष्ट्रीय बालिका दिवस मनाया जाता है।

2008 में हुई थी राष्ट्रीय बालिका दिवस की शुरुआत-

राष्ट्रीय बालिका दिवस की शुरुआत साल 2008 से हुई थी और इसकी शुरुआत महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा की गई थी। इसका उद्देश्य लड़के-लड़कियों के बीच भेदभाव के प्रति जागरूकता बढ़ाना, समान अवसरों को प्रोत्साहित करना और ऐसा माहौल बनाना है, जहां बालिकाएं सशक्त नागरिक के रूप में आगे बढ़ सकें। यह पहल महिला नेतृत्व वाले विकास और साल 2047 तक ‘विकसित भारत’ के विजन से भी जुड़ी हुई है।

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