उत्तर प्रदेश में जनवरी माह में उपभोग की गई बिजली के लिए उपभोक्ताओं को फरवरी में 10 प्रतिशत ज्यादा बिल चुकाना होगा, फ्यूल सरचार्ज (ईंधन अधिभार) के नाम पर बिजली कंपनियां जनवरी के बिल के साथ 616.05 करोड़ रुपये** अतिरिक्त वसूलेंगी।
इस कदम के खिलाफ उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने सवाल उठाया है, परिषद ने पावर कॉरपोरेशन के रिकॉर्ड 10 प्रतिशत ईंधन अधिभार वसूलने के आदेश पर महंगी बिजली खरीद की स्वतंत्र और उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है, साथ ही परिषद ने विद्युत नियामक आयोग में लोक महत्व का प्रस्ताव दाखिल कर तत्काल रोक लगाने की भी अपील की है।
AAP ने साधा सरकार पर निशाना
इस मुद्दे पर आम आदमी पार्टी के प्रदेश कार्यालय लखनऊ से मुख्य प्रदेश प्रवक्ता वंशराज दुबे ने प्रेसवार्ता की उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि, “हमारे बिजली विभाग के मंत्री को नोबेल पुरस्कार मिलना चाहिए, क्योंकि कक्षा दो का बच्चा भी समझ सकता है कि गर्मी में बिजली की मांग ज्यादा होती है, और उस समय बिजली चार रुपये में खरीदना, जबकि नवंबर में खपत कम होने पर पांच रुपये 88 पैसे में खरीदना सीधे जनता के लिए दर्दनाक है।”
वंशराज दुबे ने आगे कहा, “इसका मतलब साफ है – जनता चाहे बिजली जलाए या न जलाए, सरकार और बिजली कंपनियां अपना फायदा सुनिश्चित कर रही हैं। और जो स्मार्ट मीटर लगाए गए हैं, वो वास्तव में ‘डाकू मीटर’ हैं पंखा चले या न चले, एसी चले या न चले, बिल बुलेट ट्रेन की तरह दौड़ता है।”
मांग और चेतावनी
वंशराज दुबे ने कहा कि आम आदमी पार्टी मांग करती है कि जनता से की जा रही इस तरह की वसूली को रोकने और बिजली कंपनियों को फायदा पहुँचाने की उच्चस्तरीय जांच की जाए, उन्होंने चेतावनी दी कि अगर तुरंत रोक नहीं लगाई गई और पैसे वापस नहीं किए गए, तो पार्टी सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन करेगी।





