उत्तर प्रदेश में अब कारोबार सिर्फ़ शहरों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि गांवों से निकलकर सीधे ग्लोबल बाज़ार तक पहुंचने लगा है। पहले हालात ऐसे थे कि गांव का अच्छा-खासा प्रोडक्ट भी स्थानीय मंडी या छोटे शहरों तक ही सिमट कर रह जाता था। किसान और छोटे व्यापारी मेहनत तो पूरी करते थे, लेकिन सही जानकारी और सिस्टम की कमी के कारण उन्हें अपने सामान का पूरा दाम नहीं मिल पाता था। मुनाफा अक्सर बिचौलियों की जेब में चला जाता था।
अब यही तस्वीर तेज़ी से बदल रही है। योगी सरकार की MSME से जुड़ी योजनाएं छोटे व्यापारियों, कारीगरों और किसानों के लिए नया रास्ता खोल रही हैं। यूपी के हाशिम अंसारी जैसे कई उद्यमी इसकी मिसाल हैं, जिन्हें MSME रैंप प्रोग्राम के ज़रिए न सिर्फ़ बिज़नेस की ट्रेनिंग मिली, बल्कि फाइनेंशियल सपोर्ट, स्किल डेवलपमेंट और बाज़ार तक सीधी पहुंच भी हासिल हुई। प्रदेश के अलग-अलग शहरों में ऐसे कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, जहां लोगों को यह समझाया जा रहा है कि सीमित काग़ज़ी प्रक्रिया के साथ दो करोड़ रुपये तक का लोन कैसे लिया जा सकता है और अपने बिज़नेस को बड़े स्तर पर कैसे ले जाया जाए। महिला उद्यमियों के लिए सरकार ने अतिरिक्त सहूलियतें दी हैं। यदि कोई महिला बिज़नेस के लिए ज़मीन खरीदती है, तो उसे स्टैंप ड्यूटी में सौ प्रतिशत की छूट मिल रही है।
इसका सीधा मतलब है कि महिलाओं के लिए कारोबार शुरू करने की लागत पहले से कहीं कम हो गई है। वहीं पूर्वांचल और बुंदेलखंड जैसे इलाकों में उद्योग लगाने वालों को बाकी यूपी की तुलना में ज़्यादा सब्सिडी दी जा रही है। इतना ही नहीं, नए उद्योगों के लिए कर्मचारियों के EPF का पूरा खर्च पांच साल तक सरकार खुद उठा रही है।यूपी के पारंपरिक प्रोडक्ट अब पहचान के मोहताज नहीं रहे। अयोध्या का गुड़, सिद्धार्थनगर का खास चावल, मुरादाबाद का पीतल, कानपुर और आगरा का लेदर—ऐसे तमाम उत्पाद हैं जिनकी मांग देश ही नहीं, विदेशों में भी है। MSME रैंप प्रोग्राम के ज़रिए उद्यमियों को सिखाया जा रहा है कि प्रोडक्ट की क्वालिटी कैसे बेहतर करें, पैकेजिंग और ब्रांडिंग कैसे हो और अंतरराष्ट्रीय बाज़ार तक पहुंच कैसे बनाई जाए। सरकार सर्टिफिकेशन के स्तर पर भी बड़ी मदद कर रही है। पेटेंट के लिए दस लाख रुपये तक की सहायता दी जा रही है। GI टैग, GMP और ZED जैसे ज़रूरी सर्टिफिकेट पर पचहत्तर प्रतिशत तक की सब्सिडी मिल रही है, जो हर छोटे-बड़े बिज़नेस के लिए बेहद अहम माने जाते हैं।
इसके अलावा यूरोपियन यूनियन जैसे विदेशी बाज़ारों में लागू नए ESG नियमों के मुताबिक कारोबार को तैयार करने की ट्रेनिंग भी इसी प्रोग्राम का हिस्सा है। बीमा कंपनियां भी इन कार्यक्रमों में मौजूद रहती हैं, ताकि उद्यमी अपने बिज़नेस को सुरक्षित करने से जुड़ी सही जानकारी ले सकें।अगर कोई इस योजना की जानकारी लेना चाहता है, तो उसके लिए भी रास्ता आसान रखा गया है। अपने नजदीकी जिला उद्योग प्रोत्साहन एवं उद्यमिता विकास केंद्र में जाकर सीधे संपर्क किया जा सकता है या फिर diupmsme.upsdc.gov.in वेबसाइट पर पूरी डिटेल उपलब्ध है।कोविड के बाद आत्मनिर्भर भारत की जो कल्पना की गई थी, उसमें उत्तर प्रदेश अब एक अहम भूमिका निभाता दिख रहा है। यहां प्रोडक्ट बनाने से लेकर बेचने और उसकी गुणवत्ता तक हर स्तर पर सरकार का फोकस है। शायद यही वजह है कि आज यूपी का किसान और कारीगर खुले मंच से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का धन्यवाद करते नज़र आ रहा है, क्योंकि अब मेहनत का सही दाम और आगे बढ़ने का मौका दोनों उसे मिल रहे हैं।





