महाशिवरात्रि का महत्व
महाशिवरात्रि का दिन बहुत खास माना जाता है, यह वही दिन है जब भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था, इस दिन शिवजी की विधिपूर्वक पूजा और व्रत करने से पूरे साल उनकी कृपा प्राप्त होती है, व्रत आमतौर पर फलाहार करके किया जाता है और शाम से रात्रि तक शिवजी की विशेष पूजा की जाती है।
महाशिवरात्रि व्रत में क्या न करें
- काले कपड़े न पहनें।
- बुरे विचार, झगड़े और कटु वचन न बोलें।
- दिन में सोना वर्जित है; इसके बजाय शिवजी के मंत्रों का जाप करें।
- पूजा में हल्दी, सिंदूर, केतकी, कमल, तुलसी और शंख का प्रयोग न करें।
- नमक का सेवन न करें; केवल फलाहार करें।
- त्रयोदशी तिथि से ही लहसुन, प्याज और अन्य तामसिक भोजन न करें।
- खट्टे फल शिवजी को न चढ़ाएँ; सफेद मिष्ठान दें।
- शिवलिंग की पूरी परिक्रमा न करें, केवल आधी परिक्रमा करें।
- परिवार के अन्य सदस्य भी सात्विक भोजन करें।
महाशिवरात्रि व्रत में क्या करें
- त्रयोदशी तिथि से सात्विक भोजन करें।
- सुबह स्नान करके व्रत का संकल्प लें।
- दिन में चार पहर की पूजा करें और शिवजी के मंत्रों का जाप करें।
- रात्रि में निशीथ काल तक शिवजी की विशेष पूजा और भजन करें।
- फलाहार करके व्रत रखें और शिवजी का अभिषेक करें; बेलपत्र, धतूरा आदि अर्पित करें।
- महिलाएं माता पार्वती को सुहाग की सामग्री अर्पित करें, जिससे दांपत्य जीवन सुखद रहता है।
- शाम में सात्विक भोजन में सेंधा नमक का प्रयोग करें।
महाशिवरात्रि व्रत और पूजा का सही पालन करने से शिवजी की विशेष कृपा मिलती है और मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं।







