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उत्तर प्रदेश में अपराध नियंत्रण पर सख्त समीक्षा, डीजीपी ने अधिकारियों को दिए कड़े निर्देश

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्ण ने मंगलवार को पुलिस मुख्यालय से प्रदेश भर के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के साथ ऑनलाइन उच्चस्तरीय अपराध समीक्षा बैठक की। बैठक में कानून-व्यवस्था की स्थिति, जनशिकायतों के निस्तारण, विवेचनाओं की गुणवत्ता, सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने के प्रयास और तकनीकी साधनों के बेहतर उपयोग जैसे अहम मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की गई।
बैठक में जोनल अपर पुलिस महानिदेशक, पुलिस आयुक्त, आईजी-डीआईजी रेंज और जिलों के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक/पुलिस अधीक्षक शामिल हुए। डीजीपी ने स्पष्ट किया कि प्रभावी पुलिसिंग का उद्देश्य केवल अपराध होने के बाद कार्रवाई करना नहीं, बल्कि अपराध होने से पहले ही विवादों और घटनाओं को रोकना होना चाहिए।

जनशिकायतों के निस्तारण पर खास जोर

बैठक में बताया गया कि प्रदेश में जनशिकायतों के समाधान को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। पिछले कुछ महीनों में योजनाबद्ध प्रयासों के चलते शिकायतों में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है।
समीक्षा में सामने आया कि कई जिलों में शिकायतों में बड़ी गिरावट आई है। सम्भल, फिरोजाबाद और इटावा जैसे जिलों में करीब 70 प्रतिशत तक कमी दर्ज की गई, जबकि कई अन्य जिलों में भी 40 प्रतिशत से अधिक कमी देखने को मिली।
डीजीपी ने इसे सुशासन की दिशा में सकारात्मक कदम बताते हुए निर्देश दिया कि जिन जिलों में बेहतर परिणाम आए हैं, वहां अपनाए गए मॉडल को अन्य जिलों में भी लागू किया जाए।

समयबद्ध विवेचना पर अधिकारियों को निर्देश

बैठक में लंबित विवेचनाओं और उनकी गुणवत्ता को लेकर भी समीक्षा की गई। डीजीपी ने कहा कि सामान्य मामलों की विवेचना 60 दिनों और गंभीर अपराधों की विवेचना 90 दिनों के भीतर पूरी करने का लक्ष्य तय किया गया है।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि जांच की गुणवत्ता से समझौता किए बिना तय समय सीमा में आरोप पत्र दाखिल किए जाएं और वरिष्ठ अधिकारी नियमित रूप से इसकी समीक्षा करें।

सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने की रणनीति

बैठक में जीरो फैटलिटी डिस्ट्रिक्ट अभियान की भी समीक्षा की गई। इस योजना का उद्देश्य सड़क दुर्घटनाओं में मौतों की संख्या को कम करना है।
समीक्षा के दौरान पाया गया कि कई जिलों में दुर्घटनाओं की संख्या में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है। श्रावस्ती, जालौन और गाजियाबाद ग्रामीण जोन जैसे क्षेत्रों में इस दिशा में बेहतर परिणाम सामने आए हैं।

बीट पुलिसिंग में तकनीक का बढ़ेगा इस्तेमाल

डीजीपी ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि यक्ष ऐप का अधिक से अधिक उपयोग सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि इस ऐप के माध्यम से बीट पुलिसिंग को और प्रभावी बनाया जा सकता है तथा अपराध की रोकथाम के लिए बेहतर डेटा तैयार होगा।

मादक पदार्थों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश

बैठक में एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स की कार्यवाही की भी समीक्षा की गई। डीजीपी ने कहा कि मादक पदार्थों की तस्करी में शामिल अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए और उनकी अवैध संपत्तियों को जब्त करने की प्रक्रिया भी तेज की जाए।
इसके साथ ही जब्त मादक पदार्थों के निस्तारण के लिए विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए गए।

डिजिटल साक्ष्य और ई-प्रणाली पर फोकस

डीजीपी ने ई-सम्मन और ई-साक्ष्य प्रणाली को और प्रभावी बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पुलिस को आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक साक्ष्यों का अधिक उपयोग करना चाहिए, जिससे जांच प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और मजबूत बन सके।

बेहतर पुलिसिंग के लिए सख्त मॉनिटरिंग

बैठक के अंत में डीजीपी ने सभी अधिकारियों को निर्देश दिया कि राज्य सरकार की प्राथमिकताओं के अनुरूप पूरी जिम्मेदारी और पेशेवर दक्षता के साथ कार्य करें। जिन जिलों में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ है, वहां कार्ययोजना को सख्ती से लागू करने के निर्देश दिए गए।
उन्होंने कहा कि बेहतर पुलिसिंग के लिए नियमित समीक्षा और जवाबदेही सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है।

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