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संघ की बैठकों में बार-बार क्यों पहुंच रहे हैं योगी आदित्यनाथ? 2027 से पहले सियासत में बड़ी हलचल!

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उत्तर प्रदेश की राजनीति में इन दिनों एक नई हलचल देखने को मिल रही है। मुख्यमंत्री Yogi Adityanath पिछले एक महीने में पांच अलग-अलग जगहों पर संघ की समन्वय बैठकों में शामिल हो चुके हैं। गोरखपुर, लखनऊ, मथुरा-आगरा मंडल, प्रयागराज और कानपुर में हुई इन बैठकों ने राजनीतिक गलियारों में कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

बताया जा रहा है कि यह पहला मौका है जब मुख्यमंत्री इतनी सक्रियता के साथ संघ के कार्यक्रमों में भाग ले रहे हैं और वहां स्वयंसेवकों के सीधे और तीखे सवालों का जवाब दे रहे हैं। इन बैठकों में शंकराचार्य विवाद से लेकर सरकार के कामकाज और जमीनी स्तर की फीडबैक तक कई मुद्दों पर खुलकर चर्चा हुई।

सूत्रों के मुताबिक, मुख्यमंत्री ने साफ तौर पर कहा कि शंकराचार्य से जुड़े मामलों में सरकार की कोई भूमिका नहीं रही है। लेकिन इन बैठकों का सिलसिला इस बात का संकेत जरूर दे रहा है कि अब संघ सरकार और संगठन दोनों के कामकाज पर पहले से ज्यादा बारीकी से नजर रख रहा है।

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दरअसल, 2025 के संसदीय चुनावों में उत्तर प्रदेश में बीजेपी के उम्मीद से कमजोर प्रदर्शन के बाद संघ की सक्रियता और बढ़ गई है। हरियाणा और महाराष्ट्र के चुनाव नतीजों ने यह संदेश भी दिया कि जब तक संघ और बीजेपी साथ मिलकर मैदान में नहीं उतरते, तब तक जीत की राह आसान नहीं होती।

यही वजह है कि 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले संघ की भूमिका और भी निर्णायक होती दिखाई दे रही है। यूजीसी से जुड़े मुद्दों पर सवर्ण समाज की नाराजगी हो या अन्य सामाजिक समीकरण संघ और बीजेपी अब मिलकर नई रणनीति तैयार करने में जुटे हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 2027 की सत्ता की राह तय करने के लिए बीजेपी अब संघ के मार्गदर्शन और उसके मजबूत जमीनी नेटवर्क पर पहले से कहीं ज्यादा निर्भर नजर आ रही है।

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