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13 साल बाद खत्म हुआ लंबा इंतजार: हरीश राणा का निधन, गाजियाबाद में हुआ अंतिम संस्कार

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गाजियाबाद के रहने वाले हरीश राणा का बुधवार को ग्रीन पार्क श्मशान घाट में अंतिम संस्कार किया गया। इस मौके पर उनके परिवार के सदस्य, रिश्तेदार, पड़ोसी और दोस्त बड़ी संख्या में मौजूद रहे। हरीश को उनके भाई और बहन ने मुखाग्नि दी। अंतिम संस्कार से पहले गायत्री मंत्र का जाप किया गया और करीब 10 मिनट का मौन रखकर उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की गई।

अंतिम संस्कार में उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय भी पहुंचे। उन्होंने परिवार के प्रति संवेदना जताते हुए कहा कि इस कठिन समय में पूरी कांग्रेस पार्टी हरीश राणा के परिवार के साथ खड़ी है। उन्होंने हरीश के अंगदान के फैसले की सराहना करते हुए कहा कि यह एक बहुत ही महान कार्य है।

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परिवार इस घटना से बेहद दुखी नजर आया। हरीश के पिता ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि अभी वे कुछ कहने की स्थिति में नहीं हैं और कुछ दिनों बाद ही बात कर पाएंगे। वहीं, पड़ोसियों ने बताया कि परिवार ने पिछले कई सालों से बहुत मुश्किल समय देखा है और अब हरीश को इस दर्द से मुक्ति मिल गई है।

हरीश राणा का निधन मंगलवार को अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान में हुआ। वे पिछले 13 साल से अधिक समय से कोमा में थे। 2013 में एक हादसे में चौथी मंजिल से गिरने के कारण उनके सिर में गंभीर चोट आई थी, जिसके बाद से वे होश में नहीं आ पाए थे। उन्हें कृत्रिम तरीके से खाना और ऑक्सीजन दी जा रही थी।

हाल ही में, 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसले में हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दी थी। इसके बाद उन्हें गाजियाबाद से दिल्ली एम्स के पैलिएटिव केयर यूनिट में शिफ्ट किया गया था, जहां उनका इलाज चल रहा था।

हरीश राणा देश के उन चुनिंदा मामलों में से एक थे, जहां अदालत ने इच्छामृत्यु की अनुमति दी। उनके मामले ने पूरे देश में संवेदनशील बहस को जन्म दिया था—जिसमें लंबे समय तक कोमा में रहने वाले मरीजों की देखभाल, उनके अधिकार और परिवार की स्थिति जैसे मुद्दे शामिल थे।

13 साल के लंबे संघर्ष के बाद आखिरकार हरीश राणा ने अंतिम सांस ली। उनका जीवन और संघर्ष लोगों के लिए एक भावुक और सोचने पर मजबूर करने वाला उदाहरण बन गया है।

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