Ayodhya की रामनगरी में रामनवमी के मौके पर एक बेहद खास और दिव्य दृश्य देखने को मिला। देश-विदेश से आए सैकड़ों श्रद्धालु इस ऐतिहासिक पल के गवाह बने। शुक्रवार दोपहर ठीक 12 बजे Ram Lalla का सूर्यतिलक किया गया, जिसे देखने के लिए मंदिर परिसर में भारी भीड़ उमड़ी थी।
जैसे ही सूर्य की किरणें रामलला के ललाट पर पड़ीं, पूरा माहौल भक्तिमय हो गया। मंदिर में मौजूद श्रद्धालु खुशी और उत्साह से झूम उठे। चारों तरफ “जय श्रीराम” के जयकारे गूंजने लगे। मंदिर के घंटों की आवाज और भजनों के बीच भक्तों ने आरती की और इस खास पल को अपने दिल में संजो लिया।सूर्यतिलक का यह अद्भुत दृश्य करीब चार मिनट तक चला। इस दौरान सूर्य की किरणें एक खास वैज्ञानिक प्रक्रिया के जरिए रामलला की मूर्ति के माथे पर तिलक के रूप में दिखाई दीं। यह नजारा इतना आकर्षक था कि श्रद्धालु उसे देखते ही रह गए।
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इस खास आयोजन का सीधा प्रसारण टीवी पर भी किया गया, ताकि देशभर के लोग इस पल को देख सकें। Narendra Modi ने भी नई दिल्ली स्थित अपने आवास पर बैठकर इस कार्यक्रम को लाइव देखा। सूर्यतिलक के दौरान उन्होंने तालियां बजाईं और भगवान राम को हाथ जोड़कर प्रणाम किया।
इससे पहले, चैत्र नवरात्रि की अष्टमी के दिन राम मंदिर परिसर में स्थित सूर्य मंदिर में विशेष पूजा की गई। पुजारियों ने वैदिक मंत्रों के साथ ध्वजारोहण किया और मंदिर के शिखर पर ‘ॐ’ चिन्ह वाला केसरिया ध्वज फहराया गया। इस धार्मिक आयोजन ने पूरे माहौल को और भी पवित्र बना दिया।
अब बात करें सूर्यतिलक की प्रक्रिया की, तो यह पूरी तरह से विज्ञान और आस्था का अनोखा संगम है। मंदिर के ऊपरी हिस्से से सूर्य की किरणें एक पाइप के जरिए अंदर लाई जाती हैं। इसके बाद इन किरणों को कई दर्पणों (मिरर) की मदद से सही दिशा में मोड़ा जाता है। आखिर में ये किरणें रामलला की मूर्ति के ललाट पर पड़ती हैं और लगभग 75 मिमी का गोल तिलक बनाती हैं।
इस पूरी प्रक्रिया को बेहद सटीक तरीके से डिजाइन किया गया है, ताकि हर साल रामनवमी के दिन ठीक दोपहर में सूर्य की किरणें सीधे भगवान के माथे पर पड़ें। यह दृश्य न सिर्फ धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि वैज्ञानिक दृष्टि से भी बहुत खास माना जाता है।
रामनवमी के इस आयोजन ने एक बार फिर यह दिखा दिया कि भारत की परंपराएं कितनी समृद्ध और अद्भुत हैं। यहां आस्था और विज्ञान दोनों का सुंदर मेल देखने को मिलता है। अयोध्या में इस खास मौके पर पहुंचे श्रद्धालु खुद को भाग्यशाली मान रहे थे कि उन्हें इस दिव्य पल को अपनी आंखों से देखने का मौका मिला।
कुल मिलाकर, रामलला का सूर्यतिलक सिर्फ एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि एक ऐसा अनुभव है जो हर किसी के मन में गहरी छाप छोड़ जाता है। यह पल श्रद्धा, भक्ति और तकनीक के अनोखे संगम का प्रतीक बन गया है।






