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जनता ने राजनीतिक कचरा हटाया तो 9 वर्षों में स्वच्छ हुआ उत्तर प्रदेश: सीएम योगी

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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ नगर निगम के बेहतर कूड़ा प्रबंधन के लिए पर्यावरण अनुकूल हरित ऊर्जा से संचालित 250 इलेक्ट्रिक एवं सीएनजी वाहनों को फ्लैग ऑफ किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश की जनता ने जब राजनीतिक कचरे को हटाकर बदलाव की नींव रखी, उसी का परिणाम है कि स्वच्छता के क्षेत्र में डबल इंजन सरकार द्वारा शुरू किए गए प्रयास सफल रहे और रैंकिंग में उल्लेखनीय सुधार हुआ। मुख्यमंत्री ने दो टूक कहा कि प्रदेश में 2017 के पहले सत्ताधारी दलों को अंधेरा पसंद था, लेकिन हम सूर्य के उपासक हैं और सूर्यवंशी श्रीराम के अनुज लक्ष्मणजी के नाम पर लक्ष्मणपुरी में विकास को आगे बढ़ा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि नव निर्माण के 9 वर्षों में आज हमारा लखनऊ स्वच्छता रैंकिंग में देश के टॉप-3 शहरों में शामिल हुआ है। अब इस उपलब्धि को नई ऊंचाई देने के लिए हम ‘नेट जीरो’ लक्ष्य की ओर बढ़ रहे हैं, जहां कार्बन उत्सर्जन न्यूनतम हो और प्रदूषण रहित व्यवस्था विकसित हो। इसी दिशा में इलेक्ट्रिक व्हीकल्स को बढ़ावा देना एक महत्वपूर्ण और सराहनीय पहल है, जो स्वच्छ और हरित भविष्य की नींव रखेगी। प्रधानमंत्री जी की प्रेरणा से वर्ष 2017 में हमने स्ट्रीट लाइट व्यवस्था में व्यापक बदलाव किया। पहले हैलोजन की पीली लाइटें होती थीं, जो अधिक ऊर्जा खपत करती थीं, बदरंग दिखती थीं और कीड़े-मकोड़ों के कारण उनके नीचे खड़ा होना भी मुश्किल होता था। पिछली सरकारों के लिए यह व्यवस्था इसलिए सुविधाजनक थी, क्योंकि उन्हें बिजली देनी ही नहीं थी। जिनकी आदत डकैती डालना था, उनके लिए अंधेरा ठीक था। लेकिन हमारी सरकार ने तय किया कि बिना भेदभाव के 24 घंटे बिजली मिले और शहर की लाइटिंग भी एक समान, बेहतर और आधुनिक हो। इसी सोच के तहत पूरे शहर को एलईडी लाइटों से “दूधिया रोशनी” में बदलने का कार्य किया गया, ताकि हर नागरिक को सुरक्षित और बेहतर वातावरण मिल सके और अंधेरे की संस्कृति को समाप्त कर सभ्यता और विकास को आगे बढ़ाया जा सके।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज आप उत्तर प्रदेश के किसी भी शहर में जाएं, एलईडी स्ट्रीट लाइटों की दूधिया रोशनी से पूरा शहर जगमगाता दिखाई देता है। नगर निगमों ने भी स्पाइरल लाइट लगाकर शहरों को और सुंदर बनाया है। रात में सड़कों पर सुरक्षित और आकर्षक वातावरण दिखता है। लखनऊ आने वाले लोग अब इसकी खूबसूरती की सराहना करते हैं। जहां पहले 2017 से पहले अंधेरा, असुरक्षा और सफाई की कमी महसूस होती थी, आज वही शहर रोशनी, स्वच्छता और व्यवस्थित विकास का उदाहरण बनकर सामने आया है। पिछले 9 वर्षों में लखनऊ ने स्वच्छता रैंकिंग के साथ-साथ हर क्षेत्र में विकास की नई ऊंचाइयां हासिल की हैं। शहर का दायरा बढ़ा है, लोगों के जीवन स्तर में सुधार हुआ है, मेट्रो संचालन शुरू हुआ है और सड़कों के चौड़ीकरण, जल निकासी तथा बुनियादी सुविधाओं के विस्तार से कनेक्टिविटी मजबूत हुई है। आज लखनऊ डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग के एक उभरते हब के रूप में भी स्थापित हो चुका है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश और केंद्र सरकार के संयुक्त प्रयासों से 17 नगर निगमों तथा नोएडा-ग्रेटर नोएडा को मिलाकर 18 नगर निकायों को ‘सेफ सिटी’ के रूप में इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर से जोड़ते हुए सीसीटीवी कवरेज दिया गया है और अब इन्हें ‘सोलर सिटी’ के रूप में विकसित किया जा रहा है। सूर्यवंशी श्रीराम की पावन नगरी अयोध्या सोलर सिटी के रूप में विकसित हो गई है। लखनऊ में भी इसी प्रकार सोलर पैनल लगाकर कार्य आगे बढ़ाया जा रहा है। प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के तहत उत्तर प्रदेश में ₹4.25 लाख से अधिक घरों में रूफटॉप सोलर पैनल लगाए जा चुके हैं, जिससे करीब 1500 मेगावाट बिजली उत्पादन हो रहा है और लोगों के बिजली बिल आधे से कम हो गए हैं। ऐसे प्रयास न केवल लोगों को प्रोत्साहित करते हैं, बल्कि शुद्ध और ग्रीन एनर्जी को भी बढ़ावा देते हैं। अयोध्या में 40 मेगावाट का सोलर प्लांट लगाकर पूरी प्रकाश व्यवस्था सोलर ऊर्जा से संचालित की जा रही है, जो इसे सोलर सिटी के रूप में स्थापित करती है और प्रभु श्रीराम के प्रति कृतज्ञता का प्रतीक भी है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज उत्तर प्रदेश देश में पब्लिक ट्रांसपोर्ट, विशेषकर मेट्रो संचालन में अग्रणी बनकर उभरा है। लखनऊ, कानपुर, आगरा, मेरठ, गाजियाबाद, नोएडा-ग्रेटर नोएडा सहित 7 शहरों में मेट्रो सेवा शुरू हो चुकी है। बेहतर पब्लिक ट्रांसपोर्ट के कारण यात्रियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। केवल लखनऊ में ही प्रतिदिन लगभग एक लाख लोग मेट्रो से यात्रा कर रहे हैं। यह स्पष्ट करता है कि जनता को सुविधा चाहिए और उसे उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी है, जिसे सरकार प्रभावी ढंग से निभा रही है। इलेक्ट्रिक बस सेवा का तेजी से विस्तार किया जा रहा है और सिटी बस सेवाओं को चरणबद्ध तरीके से इलेक्ट्रिक बसों में बदला जा रहा है। शहरों को आपस में जोड़ने और सैटेलाइट सिटी को कनेक्ट करने के लिए भी इलेक्ट्रिक बस नेटवर्क विकसित किया जा रहा है। लखनऊ में अशोक लीलैंड की इलेक्ट्रिक बस मैन्युफैक्चरिंग यूनिट शुरू हो चुकी है। साथ ही 15 अप्रैल से टाटा की लखनऊ स्थित ऑटोमोबाइल यूनिट में भी इलेक्ट्रिक व्हीकल निर्माण को आगे बढ़ाया जाएगा। यह दर्शाता है कि सही दिशा में पहल होने पर निवेशक स्वतः आकर्षित होते हैं और विकास को गति मिलती है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन जैसी व्यवस्था सामान्य लगती है, लेकिन 2017 से पहले इसकी सोच भी नहीं थी। सत्ता में बैठे लोगों के कारनामे भी कूड़े से भरे थे। अव्यवस्था और गंदगी का परिणाम इंसेफेलाइटिस, डेंगू, मलेरिया और फाइलेरिया जैसी गंभीर बीमारियों के रूप में सामने आता था, जिसने उत्तर प्रदेश को बुरी तरह प्रभावित किया। जो राज्य विकास और विरासत का नेतृत्व कर सकता था, वह खुद बीमारू बन गया था, जहां मासूमों की असमय मौतें होती थीं। उस दौर में संवेदनहीनता और उपेक्षा हावी थी, लेकिन आज स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है। आज उत्तर प्रदेश बीमारू राज्य नहीं, बल्कि भारत की अर्थव्यवस्था का एक मजबूत ग्रोथ इंजन बनकर उभरा है और देश की शीर्ष तीन अर्थव्यवस्थाओं में अपनी जगह बना रहा है। हमने बीमारियों पर प्रभावी नियंत्रण के साथ कूड़े से उत्पन्न समस्याओं का भी समाधान किया है। जहां स्वच्छता होगी, समृद्धि भी वहीं आएगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन के लिए इलेक्ट्रिक व्हीकल इस अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। पिछले दिनों लखनऊ के लोकप्रिय सांसद माननीय राजनाथ सिंह द्वारा 200 से अधिक ऐसे वाहनों को हरी झंडी दिखाई गई थी, अब 250 नए वाहन लखनऊ के हर वार्ड में लगाए जा रहे हैं, जिससे घर-घर कूड़ा प्रबंधन को और सशक्त किया जाएगा और शहर को क्लीन सिटी, ग्रीन सिटी बनाने की दिशा में गति मिलेगी। इसी क्रम में गोमती नदी के पुनरुद्धार और कुकरैल क्षेत्र से अतिक्रमण हटाकर ‘सौमित्र वन’ का विकास किया गया है। जो पहले उपेक्षित क्षेत्र था, आज वहां का परिवर्तित स्वरूप लोगों को आकर्षित कर रहा है और लखनऊ के सकारात्मक बदलाव की पहचान बन चुका है। सीएम योगी ने कहा कि हाल में बाहर से आए कुछ लोगों ने ‘सौमित्र वन’ के बारे में पूछा, तो मैंने बताया कि पहले की सरकारों ने नदी पर अवैध कब्जे कराए थे, उसे हटाकर यह ‘सिटी वन’ विकसित किया गया है। ‘सौमित्र’ नाम भगवान लक्ष्मणजी के नाम पर रखा गया है, जो उनके प्रति कृतज्ञता का प्रतीक है। आज यह स्थान लखनऊ की शान बन चुका है।

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