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असम चुनाव से पहले Himanta Biswa Sarma के बयान पर विवाद, विपक्ष का हमला तेज

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असम में विधानसभा चुनाव से पहले राजनीति गर्म हो गई है। इसी बीच मुख्यमंत्री Himanta Biswa Sarma का एक बयान तेजी से वायरल हो रहा है, जिसने देशभर में नई बहस छेड़ दी है। इस बयान के बाद आस्था, परंपरा और व्यवहारिकता को लेकर राजनीतिक माहौल और गरमा गया है।

वायरल हो रहे बयान में कहा जा रहा है कि मुख्यमंत्री ने कहा, “गौ मांस खाओ, लेकिन घर के अंदर खाओ। हम मना नहीं कर रहे, लेकिन मंदिर के आसपास और सार्वजनिक जगहों पर इसका सेवन न करें।” इस बयान के सामने आने के बाद लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।

यह मामला सिर्फ एक बयान तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे जुड़ी विचारधारा भी चर्चा में आ गई है। Bharatiya Janata Party और Rashtriya Swayamsevak Sangh लंबे समय से गौ-रक्षा को अहम मुद्दा बताते रहे हैं। ऐसे में उसी विचारधारा से जुड़े एक मुख्यमंत्री का यह बयान कई लोगों को विरोधाभासी लग रहा है, जबकि कुछ लोग इसे व्यवहारिक नजरिया भी बता रहे हैं।

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इस बयान पर समाजवादी पार्टी के प्रमुख Akhilesh Yadav ने भी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, “भाजपा हटाओ, गौमाता बचाओ।” उन्होंने बीजेपी पर दोहरी नीति अपनाने का आरोप लगाया और सवाल किया कि एक तरफ गौ-रक्षा की बात होती है, तो दूसरी तरफ ऐसे बयान क्यों दिए जा रहे हैं।

विवाद यहीं नहीं रुका। Akhilesh Yadav ने बीजेपी सांसद Ravi Kishan पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि सांसद जनता का प्रतिनिधि होता है, न कि किसी मुख्यमंत्री का “खिलौना”। उन्होंने तंज कसते हुए यह भी पूछा कि “ये सरकार है या सर्कस?” गोरखपुर का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इस तरह के बयानों से शहर की छवि पर असर पड़ता है।

अब बड़ा सवाल यह है कि क्या यह सिर्फ चुनावी बयानबाजी है या इसके पीछे बीजेपी के अंदर कोई मतभेद है? राजनीतिक जानकारों का मानना है कि चुनाव के समय इस तरह के बयान आम होते हैं और विपक्ष इन्हें मुद्दा बनाकर जनता के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश करता है।

इस पूरे विवाद ने यह दिखा दिया है कि एक छोटा सा बयान भी राजनीति में बड़ा मुद्दा बन सकता है। फिलहाल यह मामला राजनीतिक बहस का केंद्र बना हुआ है और आने वाले दिनों में इस पर और बयानबाजी देखने को मिल सकती है।

वहीं, देश के दूसरे हिस्सों में भी चुनावी माहौल बना हुआ है। Kerala में भी विधानसभा चुनाव होने वाले हैं, जहां प्रचार अभियान खत्म हो चुका है। यहां सभी सीटों पर एक ही चरण में मतदान होगा और उसके बाद नतीजे घोषित किए जाएंगे।

कुल मिलाकर, चुनावी मौसम में ऐसे बयान राजनीति को और गर्मा देते हैं। अब देखना होगा कि इसका असर जनता के बीच कितना पड़ता है और चुनाव परिणामों पर इसका क्या प्रभाव देखने को मिलता है।

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