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यूपी विधानसभा चुनाव में बड़ा ट्विस्ट: ओवैसी ने PM मोदी के क्षेत्र में किया एंट्री

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यूपी विधानसभा चुनाव 2027: वाराणसी में AIMIM की एंट्री, बीजेपी और सपा की राजनीति में हलचल

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर सियासी हलचल अब से तेज हो गई है। पार्टियों की रैलियों, नेताओं के बयान और राजनीतिक तैयारियों ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में चुनाव से पहले ही माहौल गरम कर दिया है, इस बीच, वाराणसी जनपद से खबर मिली है कि हैदराबाद सांसद Asaduddin Owaisi की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) ने यहां प्रमुख तीन विधानसभा सीटों पर अगले चुनाव में उतरने की तैयारी पूरी कर ली है।

वाराणसी में AIMIM की तैयारी

वाराणसी जनपद और ग्रामीण क्षेत्रों को मिलाकर कुल 8 विधानसभा सीटें हैं, जिन पर पिछले 10 सालों से लगातार भारतीय जनता पार्टी और उसके समर्थित दलों का कब्जा रहा है। इनमें दक्षिणी, उत्तरी और कैंट विधानसभा सीट सबसे चर्चित मानी जाती हैं, AIMIM ने इन तीनों सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारने की पूरी तैयारी कर ली है, पार्टी के जिला उपाध्यक्ष Mukhtar Ahmed Ansari ने बताया कि प्रदेश अध्यक्ष की तरफ से इन सीटों के लिए हरी झंडी मिल चुकी है और पार्टी पूरी तैयारी में है, उनका कहना है कि जन समर्थन के कारण ये सीटें AIMIM के लिए महत्वपूर्ण हैं और बिना किसी समझौते के चुनाव लड़ा जाएगा।

सियासी समीकरण पर असर

मुख्तार अहमद अंसारी ने कहा कि AIMIM का चुनाव लड़ना सियासी खेमे में हलचल मचाने वाला है, इन सीटों पर मुस्लिम वोटरों का बड़ा प्रभाव है और कुछ प्रतिशत वोट भी परिणाम को बदलने के लिए पर्याप्त हो सकते हैं। इसके चलते, पिछले चुनाव के नतीजों को देखते हुए AIMIM की एंट्री सपा खेमे में खलबली मचाने वाली हो सकती है।

दक्षिणी, उत्तरी और कैंट विधानसभा सीट क्यों महत्वपूर्ण हैं?

वाराणसी की इन सीटों को हॉट सीट माना जाता है।

दक्षिणी विधानसभा सीट: 2022 में बेहद कम मतों के अंतर से BJP के विधायक डॉ. नीलकंठ तिवारी ने जीत हासिल की थी। यह सीट दशकों से बीजेपी के लिए अभेद किला रही है
कैंट विधानसभा सीट:पिछले चुनाव में मतदाताओं की सूची में बड़ी संख्या में बदलाव आया, और वर्तमान में दालमंडी चौड़ीकरण और काशी ज्ञानवापी जैसे विवाद भी चर्चा में रहे।
उत्तरी विधानसभा सीट: यहाँ भी मतदाता समीकरण और SIR प्रक्रिया के अनुसार मतदाताओं की सूची में बदलाव हुआ।

इन तीन सीटों पर AIMIM की एंट्री से चुनावी समीकरण बदल सकते हैं और यह देखना होगा कि बीजेपी और सपा की रणनीति पर इसका क्या असर पड़ता है।

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