महाराष्ट्र के Nashik से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने कॉर्पोरेट दुनिया और समाज दोनों को हिला कर रख दिया है। आरोप इतने गंभीर हैं कि अगर साबित होते हैं, तो यह सिर्फ अपराध नहीं बल्कि सिस्टम की बड़ी नाकामी मानी जाएगी।
एक मल्टीनेशनल IT कंपनी के भीतर कुछ कर्मचारियों पर आरोप है कि उन्होंने अपने ही सहकर्मियों को मानसिक, शारीरिक और धार्मिक स्तर पर प्रताड़ित किया। पीड़ितों का कहना है कि उन पर जबरन नमाज़ पढ़ने, बीफ खाने और अपनी धार्मिक पहचान बदलने का दबाव बनाया गया। यहीं नहीं, यौन शोषण और जबरन संबंध बनाने जैसे आरोप भी सामने आए हैं।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) गठित की है और अब तक 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है आसिफ अंसारी, शफी शेख, शाहरुख कुरैशी, रजा मेमन, तौसीफ अत्तार और दानिश शेख।इसके अलावा कंपनी की HR पद पर कार्यरत एक महिला को भी गिरफ्तार किया गया है, जबकि एक अन्य महिला आरोपी अब भी फरार बताई जा रही है।जाँच में चौंकाने वाला खुलासा ये है कि कुछ आरोपी कंपनी में टीम लीडर जैसे प्रभावशाली पदों पर थे यानी उन्होंने अपनी पोजीशन का इस्तेमाल दबाव और शोषण के लिए किया।
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चार साल तक चलता रहा ये खेल—2022 से 2026 के बीच का मामला, अब तक 9 FIR दर्ज हो चुकी हैं, जिनमें 8 हिंदू महिलाएँ और 1 हिंदू पुरुष पीड़ित हैं। आरोपों में छेड़छाड़, रेप, धार्मिक भावनाएँ आहत करना और धार्मिक विद्वेष फैलाना शामिल है।
देवलाली कैंप थाने में रेप का मामला दर्ज है, जबकि मुंबई नाका थाने में बाकी 8 केस दर्ज किए गए हैं—
4 छेड़छाड़ के,
3 छेड़छाड़ + धार्मिक भावनाएँ आहत करने के,
और 1 धार्मिक विद्वेष से जुड़ा मामला।
पीड़ित महिलाओं के आरोप और भी ज्यादा डराने वाले हैं जबरन संबंध बनाने का दबाव, अश्लील टिप्पणियाँ, यौन उत्पीड़न…यहाँ तक कि एक मामले में शादीशुदा आरोपी ने झूठा रिश्ता बताकर दुष्कर्म किया।
एक पुरुष पीड़ित ने दावा किया कि उसे बार-बार धार्मिक अपमान झेलना पड़ा और जबरन बीफ खाने के लिए मजबूर किया गया।
कुछ मामलों में “धीरे-धीरे ब्रेनवॉश” की बात भी सामने आई—महिलाओं को उनके पहनावे और जीवनशैली बदलने के लिए प्रभावित किया गया, जैसे बुर्का पहनना, रोजा रखना… यहाँ तक कि एक महिला के परिवार ने उसके बदले व्यवहार को देखकर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।
सबसे बड़ा सवाल कंपनी क्या कर रही थी?
पीड़ितों का आरोप है कि उन्होंने POSH एक्ट के तहत शिकायतें कीं, लेकिन कंपनी मैनेजमेंट ने उन्हें दबा दिया। HR विभाग, जो सुरक्षा का जिम्मेदार होता है, वही संदेह के घेरे में है और यही वजह है कि HR अधिकारी की गिरफ्तारी भी हुई है।
अब SIT इस पूरे मामले की तह तक जाने की कोशिश कर रही है,क्या यह सिर्फ कुछ लोगों का अपराध है या किसी बड़े नेटवर्क की साजिश?
क्या और भी कर्मचारी इसका शिकार हुए हैं?
यह मामला सिर्फ एक कंपनी का नहीं है—यह सवाल है सुरक्षा का, सिस्टम का और उस भरोसे का, जो लोग अपने कार्यस्थल पर लेकर जाते हैं।अब देखना ये है कि जांच कितनी गहराई तक जाती है… और क्या पीड़ितों को सच में न्याय मिल पाता है या नहीं।



