बिहार की राजनीति में उस समय हलचल तेज हो गई जब मुख्यमंत्री Nitish Kumar ने शुक्रवार (10 अप्रैल 2026) को राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ ली, इस फैसले के बाद नेता प्रतिपक्ष Tejashwi Yadav ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
“जनादेश के बावजूद बदलाव क्यों?”
Tejashwi Yadav ने कहा कि सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब जनता ने इतना बड़ा जनादेश दिया था, तो सरकार में बदलाव की जरूरत आखिर क्यों पड़ी? उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अगर यह फैसला लेना ही था तो चुनाव से पहले लिया जाना चाहिए था, न कि जनता से वोट लेने के बाद।
उन्होंने कहा,“अचानक से सीएम का वोट लेने के बाद उनकी इच्छा नहीं जगी होगी, लगता है यह फैसला उन पर थोपा गया है।”
NDA पर भी साधा निशाना
तेजस्वी यादव ने एनडीए नेताओं के पुराने दावों को भी झूठा बताया, उन्होंने कहा कि चुनाव के दौरान कहा गया था “25 से 30, फिर से नीतीश”, लेकिन अब हालात कुछ और ही नजर आ रहे हैं।
“बिहार की स्थिति बद से बदतर”
राज्य सरकार पर हमला बोलते हुए Tejashwi Yadav ने कहा कि बिहार में हालात लगातार खराब होते जा रहे हैं, उन्होंने आरोप लगाया कि बेरोजगारी और पलायन बढ़ रहा है, लेकिन सरकार के पास इसके समाधान के लिए कोई ठोस योजना नहीं है।
उन्होंने तीखे शब्दों में कहा, “इन लोगों को बिहार की चिंता नहीं है, बस अपनी कुर्सी बचाने की फिक्र है।”
“सरकार दिल्ली से चल रही है”
तेजस्वी यादव ने आगे सवाल उठाया कि अब राज्य का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा और क्या फैसले वास्तव में बिहार में लिए जा रहे हैं या दिल्ली से नियंत्रित हो रहे हैं।
नीतीश कुमार पर दबाव का आरोप
Tejashwi Yadav ने यह भी आरोप लगाया कि Nitish Kumar पर लगातार दबाव बनाया जा रहा है, उन्होंने कहा कि सार्वजनिक मंचों और सदन में भी उनके साथ असहज व्यवहार देखा गया है, जिससे यह संकेत मिलता है कि वे स्वतंत्र रूप से फैसले नहीं ले पा रहे हैं।
सियासत में बढ़ा टकराव
इस पूरे घटनाक्रम के बाद बिहार की राजनीति में टकराव और तेज हो गया है। एक ओर विपक्ष इसे जनादेश के साथ विश्वासघात बता रहा है, वहीं सत्ता पक्ष इसे राजनीतिक रणनीति और नेतृत्व विस्तार के रूप में पेश कर रहा है, अब देखने वाली बात यह होगी कि इस मुद्दे पर जनता की क्या प्रतिक्रिया रहती है और आने वाले समय में यह विवाद किस दिशा में जाता है।






