उत्तर प्रदेश का चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आ रहा है, वैसे-वैसे सियासत में हलचल तेज होती जा रही है… लेकिन इस बार निशाने पर हैं चंद्रशेखर आजाद और उनकी भीम आर्मी। वजह बनी हैं एक डॉ. रोहिणी घावरी । रावण की पूर्व प्रेमिका रोहिणी घावरी अब खुलकर मैदान में उतरने की तैयारी में हैं। स्विट्जरलैंड की नौकरी छोड़कर यूपी की राजनीति में एंट्री का ऐलान… और सीधे समाजवादी पार्टी के साथ खड़े होने का दावा। इतना ही नहीं, उन्होंने यह भी कहा कि उनकी अखिलेश यादव से बात हुई है और साफ संदेश मिला है कि चंद्रशेखर आजाद के साथ उनका कोई गठबंधन नहीं होगा।
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अब यहीं से शुरू होती है असली सियासी जंग… रोहिणी गौरी के तेवर बेहद आक्रामक हैं। उन्होंने चंद्रशेखर आजाद पर गंभीर आरोप लगाए हैं यौन शोषण से लेकर झूठ मक्कारी और धोखा देने का आरोप ,और दावा किया है कि उनके पास ऐसे सबूत हैं जो बड़ा खुलासा कर सकते हैं। अगर ये आरोप चुनावी मंचों तक पहुंचे, तो यह सिर्फ राजनीतिक हमला नहीं रहेगा, बल्कि चंद्रशेखर आजाद की छवि पर सीधा वार साबित हो सकता है।यूपी 2027 से पहले यह टकराव अब निजी से राजनीतिक हो चुका है… और सवाल यही है—क्या यह विवाद भीम आर्मी के लिए सबसे बड़ा संकट बनेगा, या फिर चंद्रशेखर आजाद इस चुनौती को पलटवार में बदल देंगे? रोहिणी घावरी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “चलो बुलावा आया है, उत्तर प्रदेश से बड़े भैया ने बुलाया है। अगले महीने से शुरू होंगी 200 बैठकें। आप सब तैयार हो जाइए, नई ऊर्जा के साथ आपकी बहन आपके साथ होगी।”चंद्रशेखर को वोट देना मतलब बीजेपी को वोट देना है। यह बात उत्तर प्रदेश के दलितों को समझाने आ रही हूं। यह आदमी बीजेपी को जीताने के लिए दिन-रात काम कर रहा है, गुमराह ना हो। वे चंद्रशेखर की ‘कथित दलित मूवमेंट’ की सच्चाई जनता के सामने लाना चाहती हैं। रोहिणी का कहना है कि यूपी में दलितों की कुल आबादी करीब 20-21 प्रतिशत है। इसमें से लगभग 12 प्रतिशत जाटव और 10 प्रतिशत नॉन जाटव दलित हैं। नॉन जाटव दलितों में पासी समाज की आबादी सबसे ज्यादा (करीब 65 लाख) है, जबकि वाल्मीकि समाज में करीब 13.19 लाख लोग हैं।






