उत्तर प्रदेश में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के बाद जारी हुई फाइनल वोटर लिस्ट ने सियासी हलकों में हलचल तेज कर दी है। नए आंकड़ों में बड़ा बदलाव देखने को मिला है, खासकर शहरी इलाकों में मतदाताओं की संख्या में भारी गिरावट दर्ज की गई है। यह गिरावट ऐसे जिलों में ज्यादा है जिन्हें अब तक बीजेपी का मजबूत गढ़ माना जाता रहा है। लखनऊ, मेरठ, नोएडा, गाजियाबाद और कानपुर नगर जैसे बड़े शहरों में वोटरों की संख्या में 18 से 22 प्रतिशत तक कमी आई है। इन इलाकों में 2022 के विधानसभा चुनाव और लोकसभा चुनावों में बीजेपी का दबदबा रहा है,

ऐसे में यह बदलाव पार्टी के लिए चिंता का कारण बन सकता है। कई प्रमुख सीटें—जैसे साहिबाबाद, आगरा कैंट, इलाहाबाद नॉर्थ, लखनऊ उत्तर और नोएडा—में लाखों की संख्या में वोटर कम हुए हैं, और इन सभी सीटों पर बीजेपी के विधायक काबिज हैं। हालांकि मुस्लिम बहुल जिलों में भी मतदाता घटे हैं, लेकिन वहां गिरावट का प्रतिशत अपेक्षाकृत कम है। रामपुर, मुरादाबाद, संभल, मुजफ्फरनगर, बिजनौर और सहारनपुर में 9 से 14 प्रतिशत के बीच कमी दर्ज की गई है, जिससे सियासी समीकरणों को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है। अगर विधानसभा सीटों के हिसाब से देखें तो जिन 16 सीटों पर 1 लाख से ज्यादा वोट कटे हैं, उनमें 15 पर बीजेपी का कब्जा है। इसी तरह 80 से 99 हजार वोट घटने वाली 21 सीटों में 19 बीजेपी के पास हैं। 50 से 80 हजार वोट घटने वाली 82 सीटों में से 55 सीटें भी बीजेपी गठबंधन के खाते में हैं। कुल मिलाकर जिन सीटों पर बड़ी गिरावट आई है, उनमें बहुमत बीजेपी के पास है, जबकि समाजवादी पार्टी की सीटों पर गिरावट अपेक्षाकृत कम (8 से 15 प्रतिशत) रही है। लखनऊ और गोरखपुर जैसे अहम इलाकों में भी वोटरों की संख्या घटी है। लखनऊ नॉर्थ में 1.5 लाख से ज्यादा, साहिबाबाद में 3 लाख से ज्यादा और नोएडा में करीब 1.8 लाख वोटर कम हुए हैं। कई शहरी सीटों पर 30 प्रतिशत से ज्यादा तक गिरावट दर्ज की गई है, जो अपने आप में चौंकाने वाला आंकड़ा है। पूरे प्रदेश की बात करें तो SIR से पहले जहां कुल वोटर संख्या करीब 15.44 करोड़ थी, वहीं अब घटकर 13.39 करोड़ रह गई है। यानी करीब 2 करोड़ वोटर कम हो गए हैं। औसतन हर विधानसभा में लगभग 71 हजार वोट घटे हैं। दिलचस्प बात यह है कि यह संख्या 2014 के लोकसभा चुनाव के मुकाबले भी कम हो गई है। अन्य राज्यों से तुलना करें तो गुजरात में 13.40 प्रतिशत वोट कटे थे, जबकि यूपी में 13.24 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई है। इसके बाद छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु जैसे राज्यों का नंबर आता है। राजनीतिक रूप से यह मुद्दा अब तूल पकड़ रहा है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने SIR प्रक्रिया को गैरकानूनी बताते हुए इसे मतदाताओं के अधिकारों का हनन कहा है। वहीं समाजवादी पार्टी भी इस बदलाव को लेकर सतर्क नजर आ रही है, क्योंकि कुछ मजबूत सीटों पर भी असर देखने को मिला है—जैसे जसवंतनगर में शिवपाल यादव के क्षेत्र में 47 हजार वोट कम हो गए हैं। कुल मिलाकर, SIR के बाद सामने आए ये आंकड़े सिर्फ आंकड़े नहीं, बल्कि यूपी की राजनीति में बड़ा संकेत माने जा रहे हैं—जहां सबसे ज्यादा असर उन्हीं इलाकों में दिख रहा है, जो अब तक सत्ता के मजबूत किले माने जाते थे।






