पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मी के बीच एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने रानीगंज में दरगाह गोशे बंगला पर चादर चढ़ाने के बाद मीडिया से बातचीत में कई अहम मुद्दों पर अपनी बात रखी। इस दौरान उन्होंने महिला आरक्षण विधेयक को लेकर भी सवाल उठाए। ओवैसी ने कहा कि उन्हें इस बिल की पूरी जानकारी नहीं दी गई है। उनका कहना था कि किसी भी विधेयक पर राय देने से पहले उसकी प्रति संबंधित पक्षों तक पहुंचनी चाहिए। उन्होंने तंज भरे लहजे में कहा, “विधेयक क्या है, इसकी जानकारी ही नहीं दी गई, कम से कम इसकी कॉपी तो भेजनी चाहिए थी।

”बंगाल की राजनीति को लेकर ओवैसी ने साफ कहा कि उनकी पार्टी का मकसद राज्य में मुसलमानों के लिए मजबूत राजनीतिक भागीदारी सुनिश्चित करना है। उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी पार्टी को कभी टीएमसी तो कभी अन्य नेता बीजेपी की ‘बी टीम’ बताते हैं, लेकिन AIMIM सिर्फ जनता की आवाज उठाने का काम कर रही है। ओवैसी ने दो टूक कहा कि मुसलमानों की गरिमा पर सवाल उठाने वाली किसी भी कोशिश को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी लगातार बंगाल में सक्रिय रहेगी और चुनाव लड़कर समुदाय को राजनीतिक ताकत देने का प्रयास करेगी। इससे पहले दुर्गापुर में भी ओवैसी ने ममता बनर्जी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा था कि राज्य में लंबे समय से तथाकथित सेक्युलर सरकारें सत्ता में रही हैं, लेकिन इसके बावजूद मुसलमानों की सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर इतने वर्षों में अल्पसंख्यक समुदाय को मजबूत नेतृत्व क्यों नहीं मिल पाया। ओवैसी ने जोर देकर कहा कि मुसलमानों को अब अपना स्वतंत्र राजनीतिक नेतृत्व चाहिए, तभी उनकी स्थिति में वास्तविक बदलाव आ सकेगा।






