योगी सरकार प्रदेश के गन्ना किसानों की आय कई गुना बढ़ाने एवं गन्ना उत्पादन को बढ़ाने के लिए लगातार नवाचार और तकनीकी सुधारों पर जोर दे रही है। इसी के तहत योगी सरकार ने गन्ना अनुसंधान को नया आयाम देते हुए टिशू कल्चर तकनीक के माध्यम से उच्च गुणवत्ता वाले बीज उत्पादन की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की है। इस पहल से न केवल गन्ना किसानों की आय में वृद्धि होगी, बल्कि प्रदेश में चीनी उत्पादन और उत्पादकता को भी मजबूती मिलेगी।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर उत्तर प्रदेश काउंसिल ऑफ शुगर केन रिसर्च (यूपीसीएसआर), शाहजहांपुर और बलरामपुर चीनी मिल्स लिमिटेड (बीसीएमएल), हैदरगढ़, बाराबंकी के बीच एमओयू साइन किया गया है। एमओयू का मुख्य उद्देश्य टिशू कल्चर तकनीक के जरिए गुणवत्तापूर्ण गन्ना बीज का उत्पादन बढ़ाना, किसानों को आधुनिक तकनीक से जोड़ना और गन्ना उत्पादन प्रणाली को अधिक प्रभावी बनाना है। गन्ना आयुक्त मिनिस्थी एस ने बताया कि एमओयू के तहत प्रदेश में टिशू कल्चर आधारित बीज उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किया जाएगा। इसमें किसानों, मिल कर्मियों और तकनीकी कर्मचारियों को टिशू कल्चर लैब और ग्रीन हाउस संचालन, प्लांटलेट तैयार करने, हार्डनिंग और खेत में रोपाई जैसी प्रक्रियाओं की व्यावहारिक जानकारी दी जाएगी। प्रशिक्षण के दौरान टिशू कल्चर से जुड़े रसायनों, उपकरणों और विभिन्न तकनीकी पहलुओं पर भी विशेष जोर रहेगा।
गन्ना आयुक्त ने बताया कि पारंपरिक विधियों की तुलना में टिशू कल्चर तकनीक से बीज उत्पादन अधिक तेज, शुद्ध और प्रभावी होता है। जहां पारंपरिक तरीके से एक एकड़ में सीमित मात्रा में बीज तैयार हो पाता है, वहीं टिशू कल्चर तकनीक के माध्यम से कम समय में बड़ी मात्रा में उच्च गुणवत्ता वाले बीज तैयार किए जा सकते हैं। इससे नई उन्नत किस्मों का तेजी से विस्तार संभव होगा और किसानों को बेहतर उत्पादन के अवसर मिलेंगे। एमओयू के तहत यूपीएससीआर और बीसीएमएल मिलकर गन्ने की उन्नत किस्मों के विकास और उनके विस्तार पर काम करेंगे। इसके साथ ही दोनों संस्थाएं मिलकर किसानों को ‘हैंड्स-ऑन’ प्रशिक्षण भी देंगी, जिससे वे इस तकनीक को आसानी से समझ सकें और अपने खेतों में लागू कर सकें।
प्रशिक्षण के लिए विशेष मॉड्यूल तैयार किए गए हैं, जिनमें टिशू कल्चर की मूलभूत जानकारी से लेकर फील्ड ट्रांसफर तक की पूरी प्रक्रिया शामिल है। गन्ना किसानों को टिशू कल्चर प्लांटलेट्स को ग्रीन हाउस में हार्डनिंग के बाद खेतों में स्थानांतरित करने की प्रक्रिया भी सिखाई जाएगी। साथ ही, किसानों को भूमि तैयारी, सिंचाई, उर्वरक प्रबंधन और पौध संरक्षण से संबंधित आधुनिक तरीकों की जानकारी दी जाएगी, ताकि फसल की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों में सुधार हो सके।






