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यूपी में सियासी घमासान: ओम प्रकाश राजभर के बयान पर बवाल, सपा ने किया पलटवार

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उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर बयानबाजी को लेकर माहौल गरमा गया है। राज्य सरकार में कैबिनेट मंत्री और Suheldev Bharatiya Samaj Party (सुभासपा) के अध्यक्ष Om Prakash Rajbhar के एक विवादित बयान ने नई राजनीतिक बहस छेड़ दी है। यादव समाज को लेकर दिए गए उनके बयान पर विपक्ष, खासकर Samajwadi Party, ने तीखी प्रतिक्रिया दी है।

क्या कहा ओम प्रकाश राजभर ने?

Om Prakash Rajbhar ने आरोप लगाया कि इतिहास में यादव समाज की भूमिका संदिग्ध रही है। उन्होंने कहा कि पहले मुगलों और बाद में अंग्रेजों की सेना में शामिल होकर उन्होंने गैर-यादव पिछड़े वर्गों के खिलाफ काम किया। इतना ही नहीं, उन्होंने यह भी दावा किया कि इतिहास में यादवों का उल्लेख नहीं मिलता।राजभर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर भी एक पोस्ट करते हुए Akhilesh Yadav पर निशाना साधा। उन्होंने सवाल उठाया कि गैर-यादव ओबीसी समाज को उनका अधिकार कब मिलेगा और आरोप लगाया कि सपा नेतृत्व केवल अपने राजनीतिक हित साधने में लगा है।

सपा विधायक अतुल प्रधान का पलटवार

राजभर के इस बयान पर Atul Pradhan ने तीखी प्रतिक्रिया दी। मेरठ की सरधना सीट से विधायक अतुल प्रधान ने राजभर को “राजनीतिक धोखेबाज” और “बिना पेंदी का लोटा” करार दिया।उन्होंने आरोप लगाया कि राजभर के विभाग में भ्रष्टाचार की कई शिकायतें सामने आ रही हैं। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि जब राजभर सपा में थे, तब वे प्रधानमंत्री Narendra Modi और मुख्यमंत्री Yogi Adityanath के खिलाफ आपत्तिजनक बयान देते थे।

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विधानसभा में भी हुई तीखी बहस

यह विवाद उस समय और बढ़ गया जब यूपी विधानसभा के विशेष सत्र के दौरान दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस हुई। बहस इतनी बढ़ गई कि सदन की कार्यवाही से अतुल प्रधान के कुछ बयान हटा दिए गए।

बताया जा रहा है कि यह विवाद गाजीपुर में एक युवती की मौत के मामले पर चर्चा के दौरान शुरू हुआ था, जहां राजभर ने सपा पर राजनीति करने का आरोप लगाया था।

ओबीसी राजनीति पर नया विवाद

Om Prakash Rajbhar ने अपने बयान में यह भी कहा कि Akhilesh Yadav ने ओबीसी और मुस्लिम समाज को धोखा दिया है। उन्होंने दावा किया कि उनकी पार्टी गैर-यादव पिछड़े वर्गों के अधिकारों के लिए संघर्ष करती रहेगी।

सियासी असर क्या?

राजभर के इस बयान ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में ओबीसी समीकरणों को लेकर नई बहस छेड़ दी है। जहां सत्तारूढ़ पक्ष इसे सामाजिक न्याय की लड़ाई बता रहा है, वहीं विपक्ष इसे समाज को बांटने की राजनीति करार दे रहा है।

आगे क्या?

इस विवाद के बाद आने वाले दिनों में राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने की संभावना है। खासकर चुनावी माहौल में इस तरह के मुद्दे सामाजिक समीकरणों को प्रभावित कर सकते हैं।

फिलहाल, यह मामला सिर्फ एक बयान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह उत्तर प्रदेश की राजनीति में जातीय और सामाजिक संतुलन पर एक बड़े विमर्श का रूप ले चुका है।

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