प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा देशवासियों से साल भर तक सोना न खरीदने, वर्क फ्रॉम होम अपनाने और ऑनलाइन मीटिंग्स को बढ़ावा देने जैसी अपील के बाद राजनीतिक बयानबाज़ी तेज हो गई है, विपक्ष का कहना है कि इस तरह की अपीलों का असर देश के बड़े तबके, खासकर मजदूर और निम्न आय वर्ग पर पड़ सकता है, इस मुद्दे पर आरजेडी सांसद मनोज कुमार झा ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है, उन्होंने कहा कि इस तरह की नीतियों और अपीलों का सबसे ज्यादा असर उस वर्ग पर पड़ेगा, जिसका अक्सर जिक्र ही नहीं किया जाता।
मजदूर वर्ग पर असर का दावा
मनोज झा ने कहा, “इसकी सबसे बड़ी मार उस तबके पर पड़ेगी जिसका आपने जिक्र तक नहीं किया, मैं दिहाड़ी मजदूर की बात कर रहा हूं… जिस तरह की चीजें आप अपील कर रहे हैं… लोगों को काम नहीं मिलेगा। वैसे ही लगभग बंदी के हालात हैं।”
उन्होंने आगे आरोप लगाया कि सरकार के मंत्रियों और उनके सार्वजनिक आचरण में किसी तरह का बदलाव नहीं दिखता, जबकि आम जनता से बड़े बदलाव की उम्मीद की जा रही है।
‘फोटो और प्रचार तक सीमित प्रयास’
आरजेडी सांसद ने यह भी कहा कि सरकार केवल दिखावे तक सीमित है। उन्होंने आरोप लगाया, “कुछ मंत्री केवल फोटो के लिए ईवी (EV) गाड़ी दिखा रहे हैं… केंद्र और राज्य सरकार एक-एक अखबार के चार-चार पन्नों को इश्तेहार से रंग देती है।”
कोविड काल का जिक्र और आलोचना
मनोज झा ने कोविड-19 महामारी का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय भी हालात बेहद गंभीर थे, लेकिन सही तरीके से प्रबंधन नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि इतिहास को छुपाया नहीं जा सकता, “गंगा और सरयू में बहती लाशें पता है… लोग इस दुनिया से निकल गए, रिकॉर्ड में नहीं आए…” — उन्होंने कहा।
संवाद की मांग
सरकार से अपील करते हुए मनोज झा ने कहा कि अभी भी समय है कि सभी पक्षों को साथ बैठाकर बातचीत की जाए, उन्होंने कहा कि सरकार को विपक्ष की बातों को गंभीरता से सुनना चाहिए और जल्दबाज़ी में फैसले लेने से बचना चाहिए।






