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आई लव मोहम्मद कहूंगा, हिम्मत है तो फांसी दे दो!” संभल मस्जिद पर बर्क का बड़ा विस्फोट, BJP पर लगाए गंभीर आरोप

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“संभल में बुलडोजर चला, मस्जिद गिरी और अब सियासत में आग लग गई है, समाजवादी पार्टी के सांसद जियाउर्रहमान बर्क ने ऐसा बयान दे दिया है जिसने राजनीतिक गलियारों में नया तूफान खड़ा कर दिया है। बर्क ने खुले मंच से कहा—’मैं आई लव मोहम्मद कहता हूं, अगर हिम्मत है तो मुझे फांसी दे दो।’ आखिर संभल की उस मस्जिद में ऐसा क्या मिला था, जिसको लेकर प्रशासन कार्रवाई की बात कर रहा है? और क्यों बर्क भाजपा सरकार पर मुसलमानों को निशाना बनाने का आरोप लगा रहे हैं? आइए जानते हैं पूरी कहानी…”उत्तर प्रदेश के संभल में सरकारी जमीन पर बनी बताई जा रही मुस्तफा कादरी मस्जिद पर बुलडोजर कार्रवाई के बाद सियासत गरमा गई है। समाजवादी पार्टी के सांसद जियाउर्रहमान बर्क ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर प्रशासन और भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है, बर्क ने कहा कि मस्जिद में मिले “आई लव मोहम्मद” पोस्टर को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं, लेकिन इसमें गलत क्या है? उन्होंने कहा, “मैं आज भी कहता हूं कि आई लव मोहम्मद कहता हूं, अगर हिम्मत है तो मुझे फांसी दे दो। आखिर किस कानून के तहत इस पर कार्रवाई होगी?” सपा सांसद ने मस्जिद में मिले हरे झंडों को लेकर भी प्रशासन पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि हरा रंग इस्लाम और धार्मिक परंपराओं से जुड़ा है।

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ईद-मिलादुन्नबी जैसे अवसरों पर ऐसे झंडों का इस्तेमाल होता है। इसे पाकिस्तान या बांग्लादेश से जोड़ना गलत है और यह केवल लोगों को भ्रमित करने की कोशिश है। जियाउर्रहमान बर्क ने भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि पिछले कुछ वर्षों में मस्जिदों, मदरसों, कब्रिस्तानों, ईदगाहों और मजारों को लगातार निशाना बनाया जा रहा है। उनके मुताबिक यह सब चुनावी राजनीति का हिस्सा है और समाज को हिंदू-मुस्लिम आधार पर बांटने की कोशिश की जा रही है। बर्क ने दावा किया कि जिस मस्जिद को ध्वस्त किया गया, वह करीब 150 साल पुरानी थी और उसका विध्वंस संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि मस्जिद वक्फ बोर्ड में पंजीकृत थी, तो तहसीलदार, एसडीएम, डीएम या कमिश्नर को उस पर फैसला लेने का अधिकार नहीं था। हालांकि प्रशासन का पक्ष भी सामने आया है। संभल के जिलाधिकारी अंकित खंडेलवाल और पुलिस अधीक्षक कृष्ण कुमार बिश्नोई ने पुष्टि की है कि कार्रवाई के दौरान मस्जिद परिसर में “आई लव मोहम्मद” लिखे पोस्टर और कुछ झंडे मिले थे। पुलिस का कहना है कि जांच की जा रही है कि ये झंडे किस उद्देश्य से लगाए गए थे और क्या उनका संबंध किसी संगठन या अन्य गतिविधि से है। अब यह मामला केवल एक बुलडोजर कार्रवाई तक सीमित नहीं रह गया है। एक तरफ प्रशासन अपनी कार्रवाई को नियमों के तहत बता रहा है, तो दूसरी तरफ सपा सांसद इसे धार्मिक अधिकारों पर हमला और राजनीतिक एजेंडा करार दे रहे हैं। ऐसे में संभल का यह विवाद आने वाले दिनों में उत्तर प्रदेश की राजनीति में और बड़ा मुद्दा बन सकता है।