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राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर बढ़ी सियासत, बृजभूषण शरण सिंह के बयान से छिड़ी नई चर्चा

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अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे के कथित दुरुपयोग और वित्तीय अनियमितताओं को लेकर उत्तर प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। विपक्षी दल लगातार इस मुद्दे को उठाते हुए भाजपा और राम मंदिर ट्रस्ट से जवाब मांग रहे हैं। वहीं, इस विवाद के बीच भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह का बयान भी चर्चा का विषय बन गया है।

“सच बोलूंगा तो परेशानी में पड़ जाऊंगा”

गोंडा में एक कार्यक्रम के दौरान पत्रकारों ने बृजभूषण शरण सिंह से राम मंदिर चढ़ावा विवाद और अन्य मुद्दों पर सवाल किया। इस पर उन्होंने कहा, “अगर मैं सच बोल दूंगा तो बहुत परेशानी में आ जाऊंगा, क्योंकि वे बहुत बड़े लोग हैं। अभी सच बोलने की हिम्मत नहीं है, समय आएगा तो जरूर बोलेंगे।”

हालांकि जब उनसे यह पूछा गया कि क्या राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय को हटाया जा सकता है, तो उन्होंने इसे अपना विषय नहीं बताते हुए टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।

भाजपा के भीतर से भी उठी जांच की मांग

विवाद के बीच भाजपा नेता और पार्टी प्रवक्ता डॉ. रजनीश सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उन्होंने सुझाव दिया है कि सीबीआई, ईडी या किसी अन्य सक्षम केंद्रीय एजेंसी से जांच कराई जाए और रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए, ताकि राम मंदिर ट्रस्ट में श्रद्धालुओं का विश्वास बना रहे।

अखिलेश यादव के आरोपों से शुरू हुआ विवाद

इस पूरे विवाद की शुरुआत समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के उस बयान से हुई, जिसमें उन्होंने राम मंदिर के चढ़ावे में कथित अनियमितताओं का आरोप लगाया था। इसके बाद आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह और सपा नेता पवन पांडे ने भी चढ़ावे की रकम में गड़बड़ी और धनराशि के कथित गायब होने के आरोप लगाए।

कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दानपात्र से चोरी और कुछ लोगों की गिरफ्तारी की भी बातें सामने आईं, हालांकि अयोध्या पुलिस ने ऐसे दावों का खंडन किया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस संबंध में प्रसारित कई जानकारियां तथ्यात्मक रूप से सही नहीं हैं।

राम जन्मभूमि ट्रस्ट ने आरोपों को बताया निराधार

विवाद बढ़ने के बाद श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने सभी आरोपों को खारिज कर दिया है। ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने कहा कि मंदिर से जुड़े सभी वित्तीय कार्यों का नियमित ऑडिट कराया जाता है। उन्होंने बताया कि दानपात्रों की गणना और उससे संबंधित प्रक्रियाओं की निगरानी ट्रस्ट के पदाधिकारी, कार्यकर्ता और स्टेट बैंक के कर्मचारी मिलकर करते हैं।

चंपत राय के अनुसार, अब तक किसी भी प्रकार की वित्तीय अनियमितता या गड़बड़ी सामने नहीं आई है। ट्रस्ट का कहना है कि सभी कार्य निर्धारित प्रक्रिया और पारदर्शिता के साथ किए जा रहे हैं।

राजनीतिक बयानबाजी के बीच बढ़ी निगाहें

राम मंदिर देश की आस्था से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय है, ऐसे में इस मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। जहां विपक्ष निष्पक्ष जांच की मांग कर रहा है, वहीं ट्रस्ट सभी आरोपों को आधारहीन बता रहा है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह मुद्दा प्रदेश की राजनीति में और अधिक चर्चा का केंद्र बना रह सकता है।