कुवैत सिटी। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने 5 से 10 जुलाई तक खाड़ी देशों के अपने व्यापक रणनीतिक दौरे के तहत कुवैत की महत्वपूर्ण आधिकारिक यात्रा पूरी की। इससे पहले उन्होंने बहरीन का सफल दौरा किया था। इस छह दिवसीय पश्चिम एशिया मिशन का मुख्य उद्देश्य ऊर्जा सुरक्षा, समुद्री सुरक्षा, द्विपक्षीय व्यापार, निवेश सहयोग तथा खाड़ी देशों में रह रहे लाखों भारतीय प्रवासियों के हितों और कल्याण को मजबूत करना रहा।यह दौरा ऐसे समय में हुआ है जब पश्चिम एशिया की बदलती भू-राजनीतिक परिस्थितियों के बीच भारत अपने रणनीतिक और आर्थिक हितों को नई गति देने में जुटा है।
कुवैत के शीर्ष नेतृत्व से हुई उच्चस्तरीय बैठकें

विदेश मंत्रालय के अनुसार, विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने कुवैत के क्राउन प्रिंस शेख सबाह अल-खालिद अल-हमद अल-मुबारक अल-सबाह और प्रधानमंत्री शेख अहमद अब्दुल्ला अल-अहमद अल-सबाह से मुलाकात की।
इसके अलावा उन्होंने—
- रक्षा मंत्री शेख अब्दुल्ला अली अब्दुल्ला अल-सलेम अल-सबाह
- विदेश मंत्री शेख जर्राह जाबेर अल-अहमद अल-सबाह
के साथ भी विस्तृत द्विपक्षीय वार्ता की।
इन बैठकों में भारत-कुवैत रणनीतिक साझेदारी, रक्षा सहयोग, ऊर्जा आपूर्ति, खाद्य सुरक्षा, निवेश, व्यापार विस्तार और क्षेत्रीय एवं वैश्विक मुद्दों पर व्यापक चर्चा हुई।
भारतीय समुदाय से मिले जयशंकर
कुवैत प्रवास के दौरान विदेश मंत्री ने वहां रह रहे भारतीय समुदाय के प्रतिनिधियों से भी मुलाकात की।उन्होंने भारतीय प्रवासियों की सराहना करते हुए कहा कि वे भारत और कुवैत के बीच मजबूत आर्थिक एवं सामाजिक संबंधों की महत्वपूर्ण कड़ी हैं। साथ ही भारत सरकार भारतीय नागरिकों के हितों और सुरक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
बहरीन में भी मजबूत हुए द्विपक्षीय संबंध
कुवैत से पहले डॉ. जयशंकर ने बहरीन का दौरा किया, जहां उन्होंने किंग हमद बिन ईसा अल खलीफा से मुलाकात की। इस दौरान क्राउन प्रिंस एवं प्रधानमंत्री प्रिंस सलमान बिन हमद अल खलीफा भी मौजूद रहे।उन्होंने उप प्रधानमंत्री शेख खालिद बिन अब्दुल्ला अल खलीफा से भी अलग बैठक की।विदेश मंत्री ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से शुभकामनाएं देते हुए भारत-बहरीन संबंधों को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई।
विदेश मंत्रियों के बीच अहम वार्ता
बहरीन के विदेश मंत्री डॉ. अब्दुल्लतीफ बिन राशिद अल ज़यानी के साथ हुई बैठक में दोनों देशों ने—
- द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा
- व्यापार एवं निवेश
- रक्षा सहयोग
- समुद्री सुरक्षा
- क्षेत्रीय एवं वैश्विक घटनाक्रम
पर विस्तार से चर्चा की।
इस अवसर पर डॉ. जयशंकर ने 2026-27 के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के अस्थायी सदस्य के रूप में बहरीन के चयन पर उन्हें बधाई भी दी
खाड़ी दौरे के चार प्रमुख उद्देश्य
डॉ. जयशंकर का यह छह दिवसीय दौरा कतर, बहरीन, कुवैत और ओमान को शामिल करता है।
इस पूरे दौरे के प्रमुख उद्देश्य हैं—
- कतर: ऊर्जा सुरक्षा और एलएनजी सहयोग को मजबूत करना।
- बहरीन: व्यापार, निवेश और समुद्री शिपिंग मार्गों की सुरक्षा बढ़ाना।
- कुवैत: खाद्य सुरक्षा, ऊर्जा सहयोग और भारतीय प्रवासियों के कल्याण को प्राथमिकता देना।
- ओमान: व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (CEPA) को अंतिम रूप देने की दिशा में प्रगति करना।
भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है खाड़ी क्षेत्र?
खाड़ी क्षेत्र भारत के लिए केवल ऊर्जा आपूर्ति का स्रोत नहीं है, बल्कि यह व्यापार, निवेश, समुद्री सुरक्षा और रणनीतिक साझेदारी का भी प्रमुख केंद्र है।भारत के लाखों नागरिक खाड़ी देशों में कार्यरत हैं, जिनके माध्यम से हर वर्ष बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा भारत आती है। इसके अलावा भारत के तेल और प्राकृतिक गैस आयात का बड़ा हिस्सा भी इसी क्षेत्र से आता है।बदलती वैश्विक परिस्थितियों के बीच यह दौरा स्पष्ट संकेत देता है कि भारत पश्चिम एशिया में अपनी रणनीतिक उपस्थिति और आर्थिक साझेदारी को लगातार मजबूत करने की दिशा में सक्रिय कूटनीति अपना रहा है।






