उन्नाव। जगद्गुरु मुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने राम मंदिर ट्रस्ट, मंदिर में कथित चोरी की घटना और जांच प्रक्रिया को लेकर कई सवाल उठाए हैं। उन्होंने दावा किया कि मंदिर में कथित चोरी की घटना सामान्य नहीं बल्कि “पूर्व नियोजित योजना” का हिस्सा प्रतीत होती है। हालांकि, उनके इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और इस संबंध में संबंधित पक्षों की आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है।
ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर जताई आपत्ति
जगद्गुरु मुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा कि राम मंदिर निर्माण का मार्ग मुकदमे के जरिए प्रशस्त करने वाले पक्षकारों और कई प्रमुख धर्माचार्यों को ट्रस्ट की प्रक्रिया से अलग रखा गया। उनका आरोप था कि ट्रस्ट के गठन और निर्णयों में उनसे कोई सलाह-मशविरा नहीं किया गया।
एसआईटी जांच की निष्पक्षता पर उठाए सवाल
उन्होंने कहा कि सरकार ने ही राम मंदिर ट्रस्ट का गठन किया है और कथित चोरी की जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) भी बनाया है। ऐसे में उन्होंने जांच की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब एक ही पक्ष व्यवस्था भी बनाए और जांच भी करे, तो निष्पक्षता को लेकर प्रश्न उठना स्वाभाविक है।
कांग्रेस नेताओं के प्रवेश को लेकर भी टिप्पणी
जगद्गुरु ने आरोप लगाया कि राम मंदिर परिसर में कांग्रेस से जुड़े कुछ लोगों को दर्शन करने से रोके जाने की घटनाएं सामने आई हैं। उन्होंने कहा कि यदि ऐसा हुआ है तो यह किसी धार्मिक स्थल के बजाय राजनीतिक दल के कार्यालय जैसा व्यवहार माना जाएगा। हालांकि, इस दावे की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
संतों के हाथ में हो ट्रस्ट का संचालन
उन्होंने मांग की कि राम मंदिर ट्रस्ट का संचालन अधिकारियों के बजाय धर्माचार्यों और संत-महात्माओं के हाथ में होना चाहिए। उनके अनुसार सरकार की भूमिका केवल निगरानी और प्रशासनिक सहयोग तक सीमित रहनी चाहिए।
बीजेपी और समाजवादी पार्टी पर भी साधा निशाना
जगद्गुरु मुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने भारतीय जनता पार्टी और समाजवादी पार्टी दोनों की राजनीति पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि मुलायम सिंह यादव को लेकर भाजपा के अलग-अलग समय पर दिए गए बयानों से “दोहरा चरित्र” दिखाई देता है।वहीं, समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव से मुलाकात के सवाल पर उन्होंने कहा कि वे किसी को मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री नहीं बनाते, बल्कि लोगों को सच्चरित्र और संस्कारित बनने की शिक्षा देते हैं।
आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार
जगद्गुरु मुक्तेश्वरानंद सरस्वती के इन बयानों के बाद अब राम मंदिर ट्रस्ट, राज्य सरकार और संबंधित राजनीतिक दलों की आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है। फिलहाल उनके आरोप व्यक्तिगत बयान हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।






