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जीरो पॉवर्टी अभियान को मिली रफ्तार, 4.25 लाख परिवारों तक पहुंचीं सरकारी योजनाएं

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लखनऊ, 11 जुलाई। उत्तर प्रदेश सरकार के महत्वाकांक्षी जीरो पॉवर्टी अभियान के तहत गरीब और वंचित परिवारों को सरकारी योजनाओं का शत-प्रतिशत लाभ दिलाने की दिशा में तेजी से काम किया जा रहा है। अभियान की ताजा समीक्षा के अनुसार प्रदेश के 4,25,101 परिवार (34 प्रतिशत) सभी पात्र सरकारी योजनाओं से आच्छादित किए जा चुके हैं। सरकार का अनुमान है कि प्रधानमंत्री आवास योजना के लंबित लक्ष्य पूरे होने के बाद यह आंकड़ा करीब 30 प्रतिशत और बढ़ेगा, जिससे लाखों जरूरतमंद परिवारों को स्थायी लाभ मिलेगा।

अभियान के पहले चरण में राशन कार्ड, आयुष्मान भारत, निराश्रित महिला पेंशन, श्रमिक (बीओसीडब्ल्यू) कार्ड, दिव्यांग पेंशन, वृद्धावस्था पेंशन, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि और प्रधानमंत्री/मुख्यमंत्री आवास योजना को शामिल किया गया है। इनमें राशन कार्ड (97%), निराश्रित महिला पेंशन (98%), श्रमिक कार्ड (95%) और आयुष्मान भारत (92%) में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई है। वहीं किसान सम्मान निधि और प्रधानमंत्री आवास योजना में लाभार्थियों को जोड़ने का कार्य तेजी से जारी है।

दूसरे चरण में शौचालय सहायता योजना, स्वयं सहायता समूह (एसएचजी), स्कूल नामांकन, हर घर नल से जल, मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना, बाल सेवा योजना, प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना और विद्युत संयोजन जैसी योजनाओं को शामिल किया गया है। इनमें शौचालय सहायता, स्वयं सहायता समूह और स्कूल नामांकन में 100 प्रतिशत उपलब्धि हासिल की जा चुकी है, जबकि अन्य योजनाओं में भी तेजी से संतृप्तिकरण किया जा रहा है।

योजना संतृप्तिकरण की जिला रैंकिंग में हाथरस 78 प्रतिशत उपलब्धि के साथ प्रदेश में पहले स्थान पर है। इसके बाद गाजियाबाद, शामली, मुजफ्फरनगर, बदायूं, अमरोहा, महाराजगंज, मेरठ, बागपत और गोरखपुर शीर्ष दस जिलों में शामिल हैं। वहीं आगरा, मऊ, प्रयागराज, बांदा, बलिया, फतेहपुर, फिरोजाबाद, श्रावस्ती, बहराइच और उन्नाव अपेक्षाकृत कम प्रदर्शन वाले जिलों में हैं, जिनमें उन्नाव अंतिम स्थान पर है।

अभियान का एक प्रमुख लक्ष्य युवाओं को कौशल विकास और रोजगार से जोड़ना भी है। प्रदेश में 18 से 35 वर्ष आयु वर्ग के करीब 19 लाख युवाओं की पहचान की गई है। अब तक 43,647 युवाओं को प्रशिक्षण दिया जा चुका है, 1,258 युवा प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं और 1,14,715 युवाओं को स्किलिंग कार्यक्रमों के लिए चिन्हित किया गया है। वहीं यूपीएसडीएम के माध्यम से 2,691 और आईटीआई के जरिए 888 प्रशिक्षित युवाओं को रोजगार से जोड़ा जा चुका है।

इसके अलावा मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना, विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना, मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना और एक जिला-एक उत्पाद (ODOP) जैसी योजनाओं के माध्यम से भी युवाओं को स्वरोजगार और उद्यमिता के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

सरकार ने इस अभियान में कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) और सामाजिक संस्थाओं की भागीदारी भी बढ़ाई है। विभिन्न संस्थाओं के सहयोग से आजीविका विकास, कौशल प्रशिक्षण, प्लेसमेंट, स्वास्थ्य सेवाएं, नेत्र जांच, मोतियाबिंद ऑपरेशन, टीबी उन्मूलन, पोषण किट, स्कूल किट तथा दिव्यांगजनों के लिए सहायक उपकरण उपलब्ध कराने की योजना पर काम किया जा रहा है। सरकार का लक्ष्य सरकारी योजनाओं और सामाजिक सहयोग के माध्यम से प्रत्येक पात्र परिवार को गरीबी से बाहर निकालकर आत्मनिर्भर बनाना है।

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