पटना: बिहार में NEET परीक्षा पेपर लीक के विरोध में हुए छात्र आंदोलन के बाद राज्य सरकार ने प्रदर्शनकारियों पर दर्ज मुकदमे वापस लेने का फैसला किया है। सरकार के इस फैसले को छात्र आंदोलन के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, लेकिन राजनीतिक विवाद अभी थमता नजर नहीं आ रहा। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि केवल मुकदमे वापस लेना पर्याप्त नहीं है, बल्कि पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच भी कराई जानी चाहिए।
तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया कि सरकार ने विपक्ष के दबाव और छात्रों के आंदोलन के बाद यह फैसला लिया है। उनका कहना है कि यदि समय रहते छात्रों की मांगों पर गंभीरता से विचार किया जाता, तो स्थिति इतनी नहीं बिगड़ती। उन्होंने कहा कि विपक्ष लगातार छात्रों, युवाओं और आम जनता के मुद्दों को सदन से लेकर सड़क तक उठाता रहेगा।
आरजेडी नेता ने दावा किया कि उनकी पार्टी के सीमित विधायक होने के बावजूद वे जनता से जुड़े मुद्दों को मजबूती से उठा रहे हैं। उन्होंने कहा कि रोजगार, शिक्षा, किसानों, महिलाओं और कमजोर वर्गों के अधिकारों से जुड़े सवालों पर विपक्ष सरकार को लगातार घेरता रहेगा। उनके अनुसार लोकतंत्र में विपक्ष की जिम्मेदारी केवल आलोचना करना नहीं, बल्कि जनता की आवाज को प्रभावी ढंग से उठाना भी है।
इस दौरान तेजस्वी यादव ने अपने बड़े भाई तेज प्रताप यादव का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हो सकते हैं, लेकिन अन्याय के खिलाफ आवाज उठाना हर जनप्रतिनिधि का दायित्व है। उन्होंने कहा कि यदि किसी भी नागरिक के साथ अन्याय होता है तो विपक्ष उसके समर्थन में खड़ा रहेगा।
नेता प्रतिपक्ष ने प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई पर भी सवाल उठाए। उन्होंने मांग की कि केवल निचले स्तर के कर्मचारियों पर कार्रवाई कर मामले को समाप्त नहीं किया जाना चाहिए। इसके बजाय उन अधिकारियों की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, जिनके नेतृत्व में पूरी कार्रवाई हुई। उन्होंने पूरे मामले की न्यायिक जांच कराने की मांग दोहराते हुए कहा कि इससे जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय हो सकेगी।
छात्र आंदोलन के दौरान गोली चलने के आरोपों का जिक्र करते हुए तेजस्वी यादव ने सरकार से घायलों से मिलने और पूरे मामले पर स्पष्ट जवाब देने की मांग की। हालांकि, गोलीबारी और अन्य आरोपों को लेकर विभिन्न दावे सामने आए हैं, लेकिन इनकी आधिकारिक पुष्टि और संबंधित एजेंसियों की जांच प्रक्रिया अभी जारी है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि NEET पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता का मुद्दा अब केवल छात्रों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह बिहार की राजनीति का प्रमुख विषय बन चुका है। ऐसे में सरकार और विपक्ष के बीच इस मुद्दे पर टकराव आगे भी जारी रहने की संभावना है।
अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या मुकदमे वापस लेने के बाद यह विवाद शांत होगा, या फिर न्यायिक जांच की मांग को लेकर बिहार की राजनीति में एक नया संघर्ष देखने को मिलेगा।






