मोहम्मद आजम खान और मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़े मामले में जांच का दायरा अब और बढ़ता नजर आ रहा है। जौहर ट्रस्ट को बड़ी रकम बतौर चंदा देने वाले लोगों पर भी जांच एजेंसियों की नजर है। इनमें कारोबारी, बड़े ठेकेदार, कुछ प्रभावशाली लोग और अधिकारी शामिल बताए जा रहे हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) इससे पहले ऐसे करीब 20 लोगों को नोटिस जारी कर पूछताछ कर चुका है।
जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच 2019-20 में भाजपा नेता आकाश सक्सेना की शिकायत के बाद आगे बढ़ी थी। इसके बाद ईडी ने लखनऊ में आजम खान के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया था। जांच में यूनिवर्सिटी के निर्माण के लिए जमीन जुटाने और कथित तौर पर सरकारी जमीन के इस्तेमाल से जुड़े आरोपों को भी जांच के दायरे में लिया गया।
आरोप है कि 2012 में उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार बनने के बाद करीब 560 एकड़ भूमि में जौहर विश्वविद्यालय के निर्माण की प्रक्रिया शुरू हुई। इस दौरान नियमों की अनदेखी कर सरकारी जमीन पर कब्जे और सरकारी संसाधनों के कथित दुरुपयोग के आरोप लगाए गए। इसके अलावा यूनिवर्सिटी और जौहर ट्रस्ट के लिए ठेकेदारों एवं कारोबारियों से बड़ी रकम चंदे के रूप में जुटाए जाने की भी जांच की गई।
आजम खान के सीतापुर जेल में रहने के दौरान ईडी ने उनसे पूछताछ की थी। इसी दौरान जांच से जुड़े करीब 20 लोगों को नोटिस जारी कर उनसे भी पूछताछ की गई थी। बाद में आयकर विभाग ने रामपुर में आजम खान के करीबी बताए जाने वाले ठेकेदारों के घरों और दफ्तरों पर छापेमारी की थी। इस कार्रवाई के दौरान जौहर ट्रस्ट से जुड़े वित्तीय लेनदेन और ईडी की जांच के बिंदुओं को भी खंगाला गया।
हाल ही में आयकर विभाग की ओर से जौहर ट्रस्ट को मिली आयकर छूट से जुड़ा पंजीकरण रद्द किए जाने के बाद इस मामले ने एक बार फिर तूल पकड़ लिया है। अब ईडी की जांच में ट्रस्ट को बड़ी रकम चंदे के रूप में देने वाले अन्य लोगों के वित्तीय लेनदेन भी जांच के दायरे में आने की संभावना है। ऐसे में आजम खान के साथ-साथ जौहर ट्रस्ट से जुड़े उनके करीबियों और बड़े दानदाताओं की मुश्किलें भी बढ़ सकती हैं।






