मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की गो संरक्षण नीति उत्तर प्रदेश में गो सेवा को रोजगार, स्वरोजगार और उद्यमिता से जोड़ने का नया मॉडल तैयार कर रही है। देसी गायों के दूध, घी, पंचगव्य, आयुर्वेदिक औषधियों और जैविक उत्पादों की मांग अब देश के साथ अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, सिंगापुर, दुबई और यूरोप के कई देशों तक पहुंच रही है। सरकार की नीति के तहत गो संरक्षण को जैविक खेती, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और स्वदेशी उत्पादों से जोड़ा जा रहा है। इसके चलते कई गोशालाएं अब संरक्षण के साथ उत्पादन और रोजगार के केंद्र के रूप में भी विकसित हो रही हैं। गाजियाबाद के सॉफ्टवेयर इंजीनियर असीम रावत ने मुख्यमंत्री योगी की प्रेरणा से गो संरक्षण के क्षेत्र में कदम रखा। उनकी संस्था ‘हेता ऑर्गेनिक’ देसी गायों के संरक्षण के साथ करीब 10 करोड़ रुपये का सालाना कारोबार कर रही है। यहां A2 बिलौना घी, पंचगव्य घृत, दूध, मिठाइयां, स्नैक्स, हर्बल उत्पाद और स्किन-हेयर केयर समेत 150 से अधिक उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं।
वाराणसी का सुरभि शोध संस्थान भी गो सेवा और रोजगार का बड़ा उदाहरण है। लखनऊ, वाराणसी, मीरजापुर और दिल्ली समेत कई स्थानों पर संचालित गोशालाओं में 28 हजार से अधिक गोवंश का संरक्षण किया जा रहा है। संस्थान से एक हजार से अधिक लोगों को रोजगार मिला है और गोबर-गोमूत्र का उपयोग जैविक खेती व विभिन्न उत्पादों के निर्माण में किया जा रहा है।
गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता के अनुसार, योगी सरकार देसी नस्ल की गायों के संरक्षण के साथ गो आधारित रोजगार, जैविक खेती और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने पर जोर दे रही है। प्रदेश में उभर रहे ये मॉडल दिखा रहे हैं कि गो सेवा अब संरक्षण के साथ ग्रामीण रोजगार और आर्थिक गतिविधियों का भी मजबूत आधार बन रही है।






