दलितों का सबसे बड़ा नेता बनने वाले चंद्रशेखर आजाद रावण को चुनौती देने के लिए दलित समाज की बेटी रोहिणी घावरी मैदान में उतर आई हैं! दिल्ली में रोहिणी के साथ ब्राह्मण-क्षत्रिय समाज मजबूती के साथ खड़ा नजर आ रहा है। सवाल है—क्या रावण की राजनीति की सबसे बड़ी पोल अब रोहिणी खोलने वाली हैं? जी हां, उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले दलित वोट बैंक को लेकर सियासी लड़ाई लगातार तेज होती जा रही है। एक तरफ मायावती अपनी जमीन बचाने की कोशिश कर रही हैं, दूसरी तरफ चंद्रशेखर आजाद लगातार दलित राजनीति में अपनी पकड़ मजबूत करने में जुटे हैं। लेकिन अब इसी मैदान में रोहिणी घावरी की सक्रियता ने नई हलचल पैदा कर दी है।
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रोहिणी घावरी मध्य प्रदेश के इंदौर की रहने वाली हैं और सफाई कर्मचारी परिवार से आती हैं। अपनी मेहनत के दम पर उन्होंने उच्च शिक्षा हासिल की और स्कॉलरशिप के जरिए स्विट्जरलैंड पहुंचकर पीएचडी की पढ़ाई की। रोहिणी का नाम चंद्रशेखर आजाद के साथ जुड़े पुराने विवाद के कारण भी चर्चा में रहा है। रोहिणी ने चंद्रशेखर पर गंभीर आरोप लगाए हैं, जबकि चंद्रशेखर इन आरोपों से इनकार करते रहे हैं। यानी यह पूरा मामला आरोप और जवाबी दावों के बीच का विवाद है। लेकिन अब कहानी सिर्फ व्यक्तिगत विवाद की नहीं रह गई है। रोहिणी लगातार आरक्षण, एससी-एसटी एक्ट और यूजीसी जैसे मुद्दों पर अपनी बेबाक राय रखती रही हैं। और अब जब वह दिल्ली पहुंचीं तो उनके साथ ब्राह्मण और क्षत्रिय समाज के लोगों की मौजूदगी ने सियासी चर्चाओं को और हवा दे दी। कहा जा रहा है कि रोहिणी आने वाले दिनों में उत्तर प्रदेश समेत देशभर में दलित समाज के बीच अपनी आवाज को मजबूत करने की तैयारी में हैं। अगर रोहिणी जमीन पर उतरकर बड़ा आंदोलन खड़ा करती हैं, तो इसका सीधा असर चंद्रशेखर आजाद की राजनीति पर पड़ सकता है। क्योंकि सवाल सिर्फ एक नेता का नहीं, बल्कि दलित समाज की राजनीतिक आवाज पर पकड़ का है। अब देखना होगा—क्या रोहिणी घावरी सिर्फ चंद्रशेखर आजाद के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद करेंगी, या 2027 से पहले दलित राजनीति में एक नया सियासी मोर्चा खड़ा कर देंगी?
