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गोरखपुर के बांसगांव थाना क्षेत्र के जयंतीपुर गांव में 19 वर्षीय बीएससी प्रथम वर्ष के छात्र शुभम मिश्रा की हत्या ने पूरे इलाके को झकझोर दिया है। घर के बरामदे में सो रहे शुभम पर गुरुवार सुबह करीब पांच बजे अज्ञात हमलावर ने चाकू से वार कर दिया।
परिवार के मुताबिक, शुभम के पिता की किडनी खराब होने के चलते परिवार इलाज के लिए लखनऊ गया हुआ था और घटना के वक्त वह घर पर अकेला था। सुबह जब हत्या की खबर मिली तो परिवार में चीख-पुकार मच गई। परिजनों का दावा है कि उन्होंने पहले ही सुरक्षा को लेकर पुलिस अधिकारियों से गुहार लगाई थी। परिवार का आरोप है कि उनकी शिकायत और सुरक्षा की मांग को गंभीरता से नहीं लिया गया। अब सवाल यही है कि अगर परिवार किसी खतरे की आशंका जता रहा था, तो उस शिकायत पर क्या कार्रवाई हुई? क्या सुरक्षा की मांग को महज एक सामान्य शिकायत समझकर छोड़ दिया गया?सरकार कानून-व्यवस्था और अपराध के खिलाफ सख्त कार्रवाई की बात करती है, लेकिन जमीनी स्तर पर अगर किसी परिवार की आशंका और सुरक्षा की गुहार समय रहते जांच के दायरे में नहीं आती, तो ऐसी घटनाएं व्यवस्था पर सवाल खड़े करती हैं।
शुभम की हत्या के बाद यह सवाल और तीखा हो गया है कि आखिर किसी अनहोनी के बाद ही शिकायतों की गंभीरता क्यों समझ आती है? क्या पुलिस को किसी बड़ी घटना का इंतजार था, या फिर शिकायतों पर समय रहते कार्रवाई की कोई ठोस व्यवस्था नहीं थी?फिलहाल पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू कर दी है और अज्ञात हमलावर की तलाश की जा रही है। हत्या की वजह क्या थी और वारदात को किसने अंजाम दिया, इसका जवाब जांच के बाद ही सामने आएगा।
