CM Yogi Announces 3 Major Administrative Reforms, Says Citizen Satisfaction Is the Real Report Card.
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि आम आदमी को अपने छोटे-छोटे कामों के लिए सरकारी कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ने चाहिए। नागरिक संतुष्टि ही किसी भी लोकसेवक का असली रिपोर्ट कार्ड है। उन्होंने प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक सक्षम, संवेदनशील और जवाबदेह बनाने के लिए सही व्यक्ति को सही पद पर तैनात करने तथा अधिकारियों-कर्मचारियों के कार्य प्रदर्शन को वार्षिक गोपनीय आख्या (एसीआर) और पदोन्नति से जोड़ने की दिशा में काम करने पर जोर दिया।
मुख्यमंत्री शुक्रवार, 23 अक्टूबर को लखनऊ के लोकभवन में मिशन कर्मयोगी के अंतर्गत आयोजित ‘साधना श्रृंखला’ की उत्तरी क्षेत्रीय कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। उपाम और भारत सरकार के क्षमता विकास आयोग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यशाला में आठ राज्यों और चार केंद्र शासित प्रदेशों के अधिकारी एवं प्रतिनिधि शामिल हुए।
‘ऑफिस-ऑफिस’ जैसी स्थिति से मुक्ति के लिए संवेदनशील प्रशासन जरूरी
सीएम योगी ने ‘ऑफिस-ऑफिस’ धारावाहिक का उल्लेख करते हुए कहा कि किसी सामान्य काम के लिए नागरिक का एक कार्यालय से दूसरे कार्यालय तक भटकना पूरे सिस्टम पर सवाल खड़ा करता है। किसी बुजुर्ग को पेंशन, किसान को सरकारी सुविधा या जरूरतमंद को समय पर सहायता न मिलना लोक सेवा के उद्देश्य के विपरीत है।
उन्होंने कहा कि समस्याओं को जानबूझकर लंबित रखना या जानकारी के अभाव में उनका समाधान नहीं कर पाना, दोनों ही प्रशासन के लिए गंभीर विषय हैं। एक अयोग्य व्यक्ति का जिम्मेदार पद पर बैठना और एक लापरवाह व्यक्ति का उस पद पर बने रहना भी खतरनाक है। इसलिए कर्मचारियों की क्षमता का निरंतर विकास, उनकी जिम्मेदारियों का स्पष्ट निर्धारण और उनके कार्यों का नियमित मूल्यांकन आवश्यक है।
सीएम योगी की तीन प्रमुख पहल
मुख्यमंत्री ने प्रशासनिक क्षमता और जनसेवाओं में सुधार के लिए तीन प्रमुख बिंदुओं पर जोर दिया।
1. उपाम बनेगा एआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस
मुख्यमंत्री ने क्षमता विकास आयोग से डॉ. राम मनोहर लोहिया उत्तर प्रदेश प्रशासन एवं प्रबंधन अकादमी (उपाम) को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में विकसित करने में सहयोग का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि एआई, डेटा एनालिटिक्स और डिजिटल तकनीक शासन व्यवस्था को तेजी से बदल रहे हैं। लोकसेवकों को इन तकनीकों के अनुरूप प्रशिक्षित करना जरूरी है, ताकि निर्णय प्रक्रिया बेहतर हो और सरकारी कामकाज सरल बने।
2. पंचायतों और नगर निकायों के कार्मिकों की क्षमता बढ़ेगी
सीएम योगी ने ग्राम पंचायतों, नगर पंचायतों, नगर पालिका परिषदों और नगर निगमों के कर्मचारियों के प्रशिक्षण एवं क्षमता विकास पर विशेष ध्यान देने की बात कही। उन्होंने कहा कि स्थानीय निकाय शासन की बुनियादी इकाइयां हैं। इन्हें मजबूत, जवाबदेह और नागरिक-केंद्रित बनाने से सरकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक प्रभावी ढंग से पहुंच सकेगा।
3. कार्य प्रदर्शन को एसीआर और पदोन्नति से जोड़ने पर जोर
मुख्यमंत्री ने ‘राइट पर्सन फॉर द राइट रोल’ यानी सही भूमिका के लिए सही व्यक्ति की अवधारणा को प्रभावी बनाने पर जोर दिया। उन्होंने क्षमता विकास आयोग से आग्रह किया कि अधिकारियों और कर्मचारियों की उपलब्धियों, कार्य प्रदर्शन तथा बेहतर कार्यों को उनकी वार्षिक गोपनीय आख्या (एसीआर) और पदोन्नति से जोड़ने की दिशा में काम किया जाए। इससे कर्मचारियों की योग्यता के अनुसार जिम्मेदारी तय करने और सही पद पर उपयुक्त व्यक्ति की तैनाती में मदद मिलेगी।
यूपी के 19.26 लाख से अधिक सरकारी कार्मिक iGOT कर्मयोगी पोर्टल पर पंजीकृत
मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में मिशन कर्मयोगी लोक सेवा की कार्यसंस्कृति में बदलाव का राष्ट्रीय अभियान है। उत्तर प्रदेश के 19.26 लाख से अधिक सरकारी कार्मिक iGOT कर्मयोगी पोर्टल पर पंजीकृत हैं और अब तक लगभग चार करोड़ प्रशिक्षण पाठ्यक्रम पूरे कर चुके हैं। वहीं, प्रदेश के 334 से अधिक प्रशिक्षण संस्थान उन्नति पोर्टल से जुड़े हैं।
उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण की सफलता केवल प्रमाणपत्रों या पाठ्यक्रमों की संख्या से नहीं मापी जानी चाहिए। वास्तविक सफलता इस बात से तय होगी कि प्रशिक्षण के बाद निर्णय कितने बेहतर हुए, सरकारी प्रक्रियाएं कितनी सरल हुईं और आम नागरिक को कितनी अच्छी सेवाएं मिलीं।
केवल डिग्री और नियुक्ति पत्र से कोई दक्ष नहीं बन जाता
मुख्यमंत्री ने गोरखपुर में सड़क निर्माण का उदाहरण देते हुए बताया कि एक सड़क को दो लेन से चार लेन बनाने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन निर्माण के दौरान सड़क को जमीन से करीब तीन मीटर ऊंचा उठा दिया गया। इससे आसपास की घनी आबादी के लोगों का आवागमन प्रभावित हुआ। शिकायत मिलने पर उन्होंने स्वयं मौके पर पहुंचकर सड़क को मूल उद्देश्य के अनुरूप बनाने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि यह मामला केवल निर्माण का नहीं, बल्कि व्यावहारिक समझ और नागरिकों की जरूरतों को पहचानने की क्षमता का भी था। डिग्री और नियुक्ति पत्र हासिल कर लेना ही किसी व्यक्ति को सक्षम अधिकारी या योग्य अभियंता नहीं बनाता। इसके लिए परिस्थितियों के अनुरूप निर्णय लेने, नई तकनीक अपनाने और अपनी जिम्मेदारियों को समझने की क्षमता विकसित करना आवश्यक है।
36 सेक्टोरल पॉलिसीज के साथ प्रशासनिक कार्यसंस्कृति में बदलाव
सीएम योगी ने कहा कि उत्तर प्रदेश ने विभिन्न क्षेत्रों में 36 सेक्टोरल पॉलिसीज तैयार की हैं। इस बदलाव में क्षमता विकास और मिशन कर्मयोगी की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उन्नति पोर्टल प्रशिक्षण संस्थानों को अपने अनुभव, विशेषज्ञता और बेहतर कार्यपद्धतियां साझा करने का अवसर देता है।
उन्होंने कहा कि विकसित भारत के निर्माण के लिए बेहतर नीतियों के साथ उन्हें प्रभावी ढंग से लागू करने वाला सक्षम, संवेदनशील और परिणामोन्मुखी प्रशासन भी जरूरी है। जब नागरिकों की परेशानी कम होगी और उन्हें समय पर समाधान मिलेगा, तभी लोक सेवा का उद्देश्य सार्थक होगा।
इंसेफेलाइटिस पर नियंत्रण का उदाहरण देकर समझाया विभागीय समन्वय का महत्व
मुख्यमंत्री ने इंसेफेलाइटिस के खिलाफ अपने संघर्ष का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 1998 से 2017 तक सांसद रहते हुए उन्होंने इस मुद्दे को सड़क से संसद तक उठाया। मुख्यमंत्री बनने के बाद इस बीमारी को केवल स्वास्थ्य विभाग की समस्या मानने के बजाय कई विभागों को अभियान से जोड़ा गया।
स्वास्थ्य, नगर विकास, पंचायती राज, ग्राम्य विकास, शिक्षा, महिला एवं बाल विकास सहित संबंधित विभागों की भूमिका तय की गई। आशा और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, पैरामेडिकल स्टाफ, बाल रोग विशेषज्ञों और स्वास्थ्य संस्थानों को भी जिम्मेदारी के अनुरूप प्रशिक्षित किया गया।
सीएम योगी के अनुसार, विभागीय समन्वय और क्षमता विकास से इंसेफेलाइटिस पर प्रभावी नियंत्रण संभव हुआ और अब प्रदेश में इस बीमारी से होने वाली मौतों की संख्या शून्य है। उन्होंने इसे स्पष्ट जिम्मेदारी, प्रशिक्षित कार्मिकों और सतत निगरानी के महत्व का उदाहरण बताया।
उत्तर प्रदेश में विकास और जनकल्याणकारी योजनाओं का उल्लेख
मुख्यमंत्री ने वर्ष 2017 से पहले की व्यवस्था का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रदेश में संभावनाएं होने के बावजूद उन्हें उपलब्धियों में बदलने के लिए आवश्यक क्षमता विकास और राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी थी। उन्होंने दावा किया कि पिछले साढ़े नौ वर्षों में प्रदेश की अर्थव्यवस्था, बजट और प्रति व्यक्ति आय तीन गुना करने में सफलता मिली है।
उन्होंने एक्सप्रेसवे नेटवर्क, सड़क-रेल-हवाई संपर्क, सात शहरों में मेट्रो सेवाओं, 65 लाख गरीब परिवारों को आवास, तीन करोड़ से अधिक परिवारों के घरों में शौचालय और 15 करोड़ से अधिक लोगों को प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना का लाभ मिलने का उल्लेख किया। बुंदेलखंड और विंध्य क्षेत्र में हर घर नल योजना, सभी 75 जिलों में बिजली की उपलब्धता, कृषि विकास दर में वृद्धि और गन्ना किसानों को नियमित भुगतान को भी उन्होंने बदलाव के उदाहरणों के रूप में प्रस्तुत किया।
कार्यशाला में केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह, क्षमता विकास आयोग की चेयरपर्सन एस. राधा चौहान, उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव शशि प्रकाश गोयल, सीबीसी की सदस्य डॉ. अलका मित्तल, सचिव जगदीप गुप्ता, उपाम के महानिदेशक एम. देवराज समेत विभिन्न राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
मुख्यमंत्री का संदेश स्पष्ट है:
प्रशासनिक प्रशिक्षण का असली उद्देश्य प्रमाणपत्र देना नहीं, बल्कि नागरिकों की समस्याओं का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करना और सरकारी सेवाओं को अधिक सरल, प्रभावी तथा जवाबदेह बनाना है।
