Bijnor News Today: उत्तर प्रदेश के बिजनौर कलेक्ट्रेट परिसर में बुधवार को उस समय हड़कंप मच गया, जब जिलाधिकारी उमेश प्रताप सिंह और एक अधिवक्ता के बीच तीखी बहस हो गई। जिला बार के पूर्व सचिव अधिवक्ता रामेंद्र सिंह ने जिलाधिकारी पर अभद्र व्यवहार करने, कार्यालय से बाहर निकालने और धक्का देने का आरोप लगाया। घटना की जानकारी मिलते ही बड़ी संख्या में अधिवक्ता कलेक्ट्रेट पहुंच गए और डीएम कार्यालय के बाहर नारेबाजी करते हुए धरने पर बैठ गए। हालांकि, बाद में जिलाधिकारी के अधिवक्ताओं के बीच पहुंचकर वार्ता करने के बाद विवाद शांत हो गया।
Bijnor News: पीड़ित की समस्या लेकर DM कार्यालय पहुंचे थे अधिवक्ता
जानकारी के मुताबिक, जिला बार के पूर्व सचिव अधिवक्ता रामेंद्र सिंह बुधवार सुबह एक पीड़ित व्यक्ति को साथ लेकर जिलाधिकारी उमेश प्रताप सिंह से मिलने उनके कार्यालय पहुंचे थे। वह पीड़ित की समस्या का समाधान कराने के लिए डीएम से बातचीत कर रहे थे।अधिवक्ता रामेंद्र सिंह का आरोप है कि बातचीत के दौरान जिलाधिकारी ने उनके साथ अभद्र व्यवहार किया। इतना ही नहीं, उन्हें कार्यालय से बाहर जाने के लिए कहा गया और धक्का भी दिया गया। इस घटना के बाद अधिवक्ता ने अन्य वकीलों को इसकी जानकारी दी, जिसके बाद कलेक्ट्रेट परिसर में विरोध शुरू हो गया।
DM कार्यालय के बाहर वकीलों की नारेबाजी, धरने पर बैठे अधिवक्ता
अधिवक्ता के साथ कथित दुर्व्यवहार की खबर फैलते ही बड़ी संख्या में वकील कलेक्ट्रेट परिसर में एकत्र हो गए। आक्रोशित अधिवक्ताओं ने डीएम कार्यालय के बाहर जमकर नारेबाजी की और धरने पर बैठ गए।वकीलों के विरोध प्रदर्शन के चलते कलेक्ट्रेट परिसर में काफी देर तक हंगामे और तनाव का माहौल बना रहा। स्थिति को देखते हुए प्रशासनिक अधिकारियों और पुलिस को मौके पर पहुंचना पड़ा।
प्रशासन ने आरोपों को बताया निराधार, जनसुनवाई का दिया हवाला
इस पूरे मामले पर अतिरिक्त मजिस्ट्रेट रामप्यारे जायसवाल ने प्रशासन का पक्ष रखते हुए अधिवक्ता के आरोपों को निराधार बताया। उन्होंने कहा कि घटना के समय जिलाधिकारी कार्यालय में जनसुनवाई चल रही थी और डीएम एक पीड़ित व्यक्ति की समस्या सुन रहे थे।प्रशासन के मुताबिक, इसी दौरान जिलाधिकारी ने सहज भाव से कहा था कि पीड़ित व्यक्ति अपनी समस्या बताने के लिए अकेले भी आ सकते थे। प्रशासन का दावा है कि इस बात पर अधिवक्ता नाराज हो गए और ऊंची आवाज में बातचीत करने लगे।प्रशासन ने स्पष्ट किया कि जिलाधिकारी की ओर से किसी प्रकार की अभद्रता या धक्का-मुक्की नहीं की गई।
वरिष्ठ अधिकारी और भारी पुलिस बल मौके पर पहुंचा
कलेक्ट्रेट परिसर में बढ़ते तनाव को देखते हुए कई वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे। इनमें एडीएम प्रशासन अंशिका दीक्षित, एडीएम एफआर देवेंद्र पाल, एएसपी सिटी डॉ. कृष्ण गोपाल सिंह, एसडीएम सदर स्मृति मिश्रा और तहसीलदार शामिल रहे।अधिकारियों ने अधिवक्ताओं से बातचीत कर स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया। सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए कलेक्ट्रेट परिसर में भारी पुलिस बल और कर्मचारियों की तैनाती की गई।
DM की अधिवक्ताओं से वार्ता के बाद समाप्त हुआ विवाद
काफी देर तक चले विरोध प्रदर्शन और हंगामे के बाद जिलाधिकारी उमेश प्रताप सिंह खुद अधिवक्ताओं के बीच पहुंचे। उन्होंने वकीलों से बातचीत की और उनकी बात सुनी। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच वार्ता हुई, जिसके बाद अधिवक्ताओं का गुस्सा शांत हुआ।फिलहाल, डीएम और अधिवक्ता के बीच हुआ विवाद वार्ता के बाद समाप्त हो गया और कलेक्ट्रेट परिसर में स्थिति सामान्य हो गई।
