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देश की राजनीति में एक बार फिर धर्म और सत्ता आमने-सामने खड़े दिखाई दे रहे हैं। काशी की पावन धरती से शुरू हुई एक यात्रा ने उत्तर प्रदेश की सियासत में भूचाल ला दिया है। शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने “गो प्रतिष्ठा धर्म युद्ध यात्रा” का आगाज करते हुए साफ संदेश दे दिया है कि अब गाय को लेकर समझौता नहीं होगा। गाय को “राष्ट्र माता” घोषित करने और बीफ के निर्यात पर पूरी तरह रोक लगाने की मांग को लेकर यह यात्रा काशी से शुरू होकर 11 मार्च 2026 को लखनऊ पहुंचेगी। लेकिन यह सिर्फ धार्मिक यात्रा नहीं मानी जा रही, बल्कि इसके राजनीतिक मायने भी तेजी से निकाले जा रहे हैं। वाराणसी के श्री विद्या मठ से शुरू हुई इस पदयात्रा में देखते ही देखते साधु-संतों और श्रद्धालुओं का बड़ा जनसैलाब उमड़ पड़ा। यात्रा जौनपुर, रायबरेली और उन्नाव होते हुए राजधानी लखनऊ पहुंचेगी। यात्रा शुरू करने से पहले शंकराचार्य ने योगी सरकार को सीधे शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा कि अगर गौ माता को राष्ट्र माता का दर्जा नहीं मिला और बीफ निर्यात पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं लगाया गया, तो आंदोलन लगातार और तेज किया जाएगा। इस पूरे घटनाक्रम के बीच समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव भी चर्चा के केंद्र में आ गए हैं। अखिलेश यादव लगातार शंकराचार्य के समर्थन में बयान दे रहे हैं और उन्होंने बीजेपी पर हमला बोलते हुए कहा कि “बीजेपी सिर्फ दिखावे की रामभक्त पार्टी है, लेकिन असल में साधु-संतों और ब्राह्मणों का अपमान करती है।” राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अखिलेश यादव इस मुद्दे के जरिए उसी हिंदुत्व की पिच पर बीजेपी को चुनौती देना चाहते हैं, जिस पर सवार होकर बीजेपी ने 2014 से लेकर 2024 तक चुनावी जीत हासिल की। ऐसे में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले यह मुद्दा यूपी की सियासत में बड़ा मोड़ ला सकता है। अब नजरें इस बात पर टिकी हैं कि लखनऊ पहुंचने वाली इस यात्रा का सियासी असर कितना बड़ा होता है। अगर साधु-संतों का यह आंदोलन और तेज हुआ तो 2027 के चुनाव से पहले बीजेपी के लिए मुश्किलें बढ़ सकती हैं, जबकि अखिलेश यादव इसे अपने पक्ष में भुनाने की पूरी कोशिश करते दिखाई दे रहे हैं।







