उत्तर प्रदेश सरकार की बहुप्रचारित मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना में बड़े स्तर पर फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है। गरीब और मेधावी छात्रों को IAS, PCS, मेडिकल और इंजीनियरिंग की निःशुल्क तैयारी कराने के उद्देश्य से शुरू की गई इस योजना में कोर्स कोऑर्डिनेटर की भर्ती प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। विभागीय जांच में पता चला है कि चयनित 69 कोर्स कोऑर्डिनेटर में से 48 अभ्यर्थी आवश्यक शैक्षिक योग्यता ही पूरी नहीं करते थे, इसके बावजूद उन्हें करीब दो साल तक नियमित वेतन दिया गया।
कैसे हुई भर्ती?
साल 2022 में समाज कल्याण विभाग ने हर जिले में अभ्युदय कोचिंग सेंटर शुरू करने का फैसला किया। इसके लिए कुल 79 कोर्स कोऑर्डिनेटर पद स्वीकृत थे, जिनमें से 10 पहले से कार्यरत थे और 69 नए पदों पर भर्ती की गई।
नियमों के अनुसार, अभ्यर्थी का UPSC या किसी राज्य लोक सेवा आयोग की मुख्य परीक्षा उत्तीर्ण होना अनिवार्य था।
जेम पोर्टल से आउटसोर्सिंग
भर्ती प्रक्रिया GeM पोर्टल के जरिए आउटसोर्सिंग मॉडल पर की गई। इसके लिए अवनी परिधि एनर्जी एंड कम्युनिकेशन प्राइवेट लिमिटेड को जिम्मेदारी दी गई।ऑनलाइन आवेदन में 8,658 उम्मीदवारों ने आवेदन किया, जिनमें से 1,998 को इंटरव्यू के लिए बुलाया गया। 13 से 16 दिसंबर 2023 के बीच समाज कल्याण विभाग की दो चयन समितियों ने साक्षात्कार किए।
जांच में चौंकाने वाले तथ्य
जांच में सामने आया कि 69 चयनित अभ्यर्थियों में से सिर्फ 21 ही मुख्य परीक्षा पास थे।
बाकी 48 अयोग्य पाए गए—4 अभ्यर्थी मुख्य परीक्षा में असफल थे,42 अभ्यर्थियों ने फर्जी मार्कशीट या झूठी अंकतालिका के जरिए चयन हासिल किया। हर कोर्स कोऑर्डिनेटर को ₹60,000 प्रतिमाह वेतन दिया गया। इस तरह दो वर्षों में अयोग्य अभ्यर्थियों को करीब ₹6 करोड़ 91 लाख 20 हजार रुपये का भुगतान कर दिया गया।
ऐसे खुला मामला
इस पूरे फर्जीवाड़े का खुलासा समाज कल्याण मंत्री असीम अरुण को मिले एक गोपनीय पत्र से हुआ, जिसमें ठोस सबूत संलग्न थे। इसके बाद मंत्री ने सभी नियुक्तियों की जांच के आदेश दिए। जांच की जिम्मेदारी छत्रपति शाहूजी महाराज शोध एवं प्रशिक्षण संस्थान के निदेशक आनंद कुमार सिंह को सौंपी गई।
जांच पूरी होने के बाद लखनऊ के गोमतीनगर थाने में आउटसोर्स कंपनी के खिलाफ FIR दर्ज कराई गई।
मंत्री के सख्त निर्देश
मंत्री असीम अरुण ने स्पष्ट किया कि इस मामले में विभागीय अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
उन्होंने कहा कि—अयोग्य अभ्यर्थियों से दो साल की तनख्वाह की रिकवरी की जाएगी,आउटसोर्स कंपनी से भी राशि वसूली जाएगी
कंपनी ने झाड़ा पल्ला
अवनी परिधि कंपनी के डायरेक्टर अज्ञात गुप्ता ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि कंपनी की चयन प्रक्रिया में कोई सीधी भूमिका नहीं थी।
उनका दावा है कि—इंटरव्यू समाज कल्याण विभाग की समितियों ने लिए,दस्तावेजों का सत्यापन भी विभाग की जिम्मेदारी थी,उन्होंने यह भी कहा कि कंपनी ने अभ्यर्थियों के सत्यापन के लिए UPPSC को पत्र लिखा था, लेकिन आयोग ने निजी कंपनी से सीधे पत्राचार करने से इनकार कर दिया।डायरेक्टर का आरोप है कि यह पूरा मामला समाज कल्याण विभाग के अंदरूनी गुटबाजी का परिणाम है और कंपनी को जानबूझकर निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने यह भी दावा किया कि विभाग ने अब तक कंपनी का पूरा भुगतान नहीं किया है, उल्टा FIR और ब्लैकलिस्टिंग की धमकी दी जा रही है।







