परसरामपुर थाना प्रभारी अजय गौड़ 5 फरवरी की रात थाने से निकले थे, लेकिन उसके बाद वापस नहीं लौटे। काफी देर तक संपर्क न होने पर पुलिस ने गुमशुदगी का मुकदमा दर्ज किया। जांच के दौरान उनकी सरकारी बाइक बस्ती के सदर कोतवाली क्षेत्र स्थित अमहट घाट के पास लावारिस हालत में मिली। इसके बाद पुलिस ने पांच टीमें गठित कर तलाश शुरू की, लेकिन कई दिनों तक कोई ठोस सुराग नहीं मिल सका।बीती रात अयोध्या की जल पुलिस को सरयू नदी में एक शव तैरता हुआ मिला। सूचना मिलते ही बस्ती पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी और परिजन मौके पर पहुंचे। शव की पहचान लापता दरोगा अजय गौड़ के रूप में हुई। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब दरोगा की बाइक बस्ती में मिली, तो शव 50 किलोमीटर दूर सरयू नदी में कैसे पहुंचा? इसी सवाल ने पूरे मामले को संदिग्ध बना दिया है। पुलिस अब सीसीटीवी फुटेज, टोल प्लाजा रिकॉर्ड और सर्विलांस के जरिए घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ने में जुटी है।
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यशवीर सिंह, एसपी बस्ती बयान
“दरोगा अजय गौड़ के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है। सीसीटीवी और सर्विलांस के माध्यम से जांच की जा रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर जल्द ही मामले का खुलासा किया जाएगा।” इस मामले ने तब और तूल पकड़ लिया जब मृतक दरोगा के भाई अरुण कुमार गौंड, जो झांसी में एडीएम पद पर तैनात हैं, बस्ती पहुंचे। उन्होंने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए और नाराजगी जताते हुए पीएम हाउस के बाहर सड़क पर धरना भी दिया। भाई की संदिग्ध मौत हुई है, लेकिन न तो डीआईजी और न ही एसपी मौके पर पहुंचे। जब वह लापता था, तब तलाश में लापरवाही बरती गई। इस पूरे मामले में एफआईआर दर्ज कर निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।”वहीं मृतक दरोगा की पत्नी ने इसे आत्महत्या नहीं, बल्कि सुनियोजित हत्या बताया है। उन्होंने किडनैप कर हत्या करने का आरोप लगाते हुए सीबीआई जांच की मांग की है।
मृतक दरोगा की पत्नी बयान
“मेरे पति को अगवा कर मारा गया है। जब वह लापता हुए, तब पुलिस ने गंभीरता से जांच नहीं की। पुराने मामलों की रंजिश में उनकी हत्या की गई है।”फिलहाल बस्ती से लेकर अयोध्या तक यह मामला कई सवाल छोड़ रहा है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और तकनीकी जांच के बाद ही साफ हो पाएगा कि दरोगा अजय गौड़ की मौत एक हादसा है, आत्महत्या या फिर एक साजिशन हत्या।








