UGC के नए नियमों पर सुप्रीम कोर्ट की ओर से लगाई गई रोक के बाद सियासी प्रतिक्रियाएं तेज हो गई हैं। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने अदालत के फैसले का स्वागत करते हुए इसे संविधान की भावना के अनुरूप बताया है। उन्होंने कहा कि हमारा संविधान किसी भी तरह के भेदभाव की इजाजत नहीं देता और न्याय का मतलब यही है कि न तो दोषी बचें और न ही किसी निर्दोष के साथ अन्याय हो।
अखिलेश यादव ने कहा कि UGC से जुड़े मामले में जो बातें सामने आ रही हैं, उनमें सबसे जरूरी यह है कि कानून की मंशा और भाषा दोनों स्पष्ट हों। उन्होंने याद दिलाया कि इससे पहले भी वर्ष 2012 में इस तरह के रेगुलेशन आए थे, लेकिन बावजूद इसके समय-समय पर भेदभाव की घटनाएं होती रही हैं। ऐसे में जरूरी है कि नियम ऐसे हों, जिनसे किसी का उत्पीड़न न हो और न ही किसी के साथ नाइंसाफी हो।सपा प्रमुख ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर भी अपनी बात रखते हुए लिखा कि सच्चा न्याय वही होता है, जिसमें किसी के साथ अन्याय न हो। माननीय न्यायालय यही सुनिश्चित करता है कि कानून सिर्फ नियमों तक सीमित न रहे, बल्कि उसकी नीयत भी साफ हो।
उन्होंने कहा कि किसी पर जुल्म-ज्यादती न हो और हर व्यक्ति के साथ समान व्यवहार किया जाए, यही न्याय की असली कसौटी है। वहीं, सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले पर उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने भी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने अदालत का आभार जताते हुए कहा कि बीजेपी सरकार की नीतियां समाज को बांटने वाली रही हैं, जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उनका कहना था कि देश सभी का है और कानून ऐसा होना चाहिए, जो हर नागरिक को बराबरी की नजर से देखे। इसके अलावा उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने भी सुप्रीम कोर्ट की रोक को अहम बताया। उन्होंने कहा कि UGC के नियम आने के बाद से ही वह कह रहे थे कि न्याय के लिए सुप्रीम कोर्ट का रास्ता खुला है। राजभर ने बताया कि सरकार की ओर से कमेटी बनाने और 15 दिन में रिपोर्ट आने की बात कही गई थी, ताकि जरूरत पड़ने पर संशोधन किया जा सके। अब सुप्रीम कोर्ट ने इस पर रोक लगाई है और आगे मामले की सुनवाई होगी, जिससे न्याय की उम्मीद और मजबूत हुई है।







