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बाराबंकी अधिवक्ता हत्याकांड: 14 दिन बाद भी पुलिस के हाथ खाली

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लखनऊ । सफेदाबाद क्षेत्र में अधिवक्ता शोएब किदवई उर्फ बॉबी की हत्या के दो सप्ताह बीत जाने के बाद भी पुलिस को अब तक कोई ठोस सफलता नहीं मिल सकी है।मामले के खुलासे की मांग को लेकर अधिवक्ताओं में लगातार आक्रोश है और पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं।

वारदात के बाद जांच का दावा, नतीजा शून्य

13 फरवरी 2026 को सफेदाबाद के असैनी मोड़ के पास हुई इस सनसनीखेज हत्या के बाद पुलिस ने कई टीमें गठित की थीं। अधिकारियों ने दावा किया था कि सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं, संदिग्धों से पूछताछ हो रही है और तकनीकी साक्ष्यों को खंगाला जा रहा है।
सूत्रों के मुताबिक, पुलिस ने स्थानीय अपराधियों से लेकर सूचीबद्ध बदमाशों और जेल में बंद आरोपियों तक की गतिविधियों की पड़ताल की। मोबाइल टॉवर डंप डेटा और कॉल डिटेल रिकॉर्ड भी जांच के दायरे में लिए गए, लेकिन अब तक किसी ठोस निष्कर्ष तक पहुंचने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

अधिवक्ताओं का अल्टीमेटम, बढ़ता दबाव

जिले के अधिवक्ताओं ने घटना के शीघ्र खुलासे की मांग करते हुए प्रशासन को अल्टीमेटम दिया है। उनका कहना है कि दिनदहाड़े हुई हत्या ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों का तर्क है कि यदि अधिवक्ता ही सुरक्षित नहीं हैं तो आम नागरिकों की सुरक्षा का क्या भरोसा।

पुरानी घटनाओं की भी याद

प्रदेश में कुछ चर्चित हत्याकांड अब तक अनसुलझे हैं। उदाहरण के तौर पर, बागपत जेल में मारे गए Munna Bajrangi के करीबी मोहम्मद तारिक और उनके रिश्तेदार पुष्पजीत सिंह की हत्याओं का खुलासा आज तक नहीं हो सका। इन मामलों का जिक्र कर विपक्ष और स्थानीय लोग पुलिस की जांच क्षमता पर सवाल उठा रहे हैं।

हाईटेक पुलिसिंग पर सवाल

राज्य सरकार द्वारा पुलिस आधुनिकीकरण के लिए संसाधन और तकनीकी उपकरण उपलब्ध कराए जाने के बावजूद इस मामले में अपेक्षित प्रगति न होने से असंतोष बढ़ा है। हालांकि पुलिस अधिकारियों का कहना है कि टीमें लगातार काम कर रही हैं और जल्द ही आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

जांच कई दिशाओं में

पुलिस सूत्रों के अनुसार, हत्या के पीछे आपसी रंजिश, पेशेगत विवाद और आपराधिक पृष्ठभूमि से जुड़े संभावित एंगल पर जांच जारी है। तकनीकी और फील्ड इंटेलिजेंस दोनों स्तरों पर साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं।
अधिवक्ता शोएब किदवई हत्याकांड का खुलासा अब कानून-व्यवस्था की परीक्षा बन चुका है। 14 दिन बीतने के बाद भी नतीजा सामने न आने से पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जांच एजेंसियां कब तक इस गुत्थी को सुलझा पाती हैं।

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