Home Political news योगी से भागवत की मुलाकात! यूपी से दिल्ली तक मची खलबली

योगी से भागवत की मुलाकात! यूपी से दिल्ली तक मची खलबली

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उत्तर प्रदेश की सियासत में कुछ बड़ा पक रहा है…दिल्ली से लेकर लखनऊ तक सत्ता के गलियारों में बेचैनी है… बीजेपी के भीतर उठती हलचल अब खुलकर सामने आने लगी है। 2027 का चुनाव करीब है… लेकिन उससे पहले सत्ता के भीतर ही शक्ति परीक्षण शुरू हो चुका है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ घिरे हैं या और मजबूत हो रहे हैं? दिल्ली कंट्रोल चाहती है या लखनऊ अपना दम दिखा रहा है? सबसे बड़ा संकेत — संघ प्रमुख मोहन भागवत का 15 दिन के भीतर दूसरा लखनऊ दौरा। सवाल सीधा है…क्या यूपी बीजेपी में सब ठीक है, या फिर पर्दे के पीछे चल रही है सत्ता संतुलन की सबसे बड़ी कवायद?

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उत्तर प्रदेश की राजनीति इस वक्त असामान्य दौर से गुजर रही है। सतह पर सब सामान्य दिखता है, लेकिन अंदरखाने सत्ता, संगठन और नेतृत्व के बीच समन्वय को लेकर गंभीर हलचल जारी है। संघ प्रमुख मोहन भागवत का 15 दिनों के भीतर दूसरी बार लखनऊ आना इसी असामान्य राजनीतिक स्थिति की ओर इशारा माना जा रहा है। इससे पहले 16 फरवरी को गोरखपुर से लखनऊ पहुंचे भागवत ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से लगभग 40 मिनट तक अकेले में मुलाकात की थी। अब उनका फिर से लखनऊ आना महज संगठनात्मक कार्यक्रम नहीं, बल्कि राजनीतिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है। पिछले कुछ दिनों में उत्तर प्रदेश बीजेपी के अंदर कई घटनाएं ऐसी हुईं जिन्होंने यह संकेत दिया कि सत्ता और संगठन के बीच तालमेल पूरी तरह सहज नहीं है। मंत्रिमंडल विस्तार की चर्चाएं,,,तीसरे डिप्टी सीएम की अटकलें,संगठन बनाम सरकार की खींचतान,,,दिल्ली नेतृत्व के बढ़ते हस्तक्षेप की चर्चाएं,,,ब्राह्मण महासभा के बैठक में पूर्व डिप्टी सीएम दिनेश शर्मा को भगा देना ,,,इसके आलावा ugc को लेकर पूरे प्रदेश में विरोध का तेज होना ,,,राजनीतिक गलियारों में यह भी कहा जा रहा है कि केंद्रीय नेतृत्व ने पंकज चौधरी को यूपी की राजनीति में सक्रिय भूमिका देने का संकेत इसलिए दिया है ताकि सरकार और संगठन के बीच संतुलन बनाया जा सके। यूपी की सियासत में ब्राह्मण समीकरण हमेशा निर्णायक रहा है। हाल के दिनों में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से जुड़े विवाद ने इस समीकरण को और संवेदनशील बना दिया। शंकराचार्य को स्नान से रोके जाने से शुरू हुआ विवाद अब व्यक्तिगत और राजनीतिक बयानबाजी तक पहुंच चुका है। प्रशासन द्वारा पहचान संबंधी सवाल उठाए जाने के बाद शंकराचार्य ने भी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से “योगी और हिंदू होने का प्रमाण” मांग लिया — जिसने विवाद को और तीखा बना दिया। इसके बाद यौन शोषण का मामला दर्ज हुआ और मामला अदालत में पहुंच गया, लेकिन राजनीतिक तापमान लगातार बढ़ता रहा। इसी बीच डिप्टी सीएम बृजेश पाठक द्वारा ब्राह्मण सम्मान को लेकर दिए गए बयान — “ब्राह्मणों की चोटी खींचना महापाप है” — को राजनीतिक संदेश माना गया। दूसरी ओर केशव प्रसाद मौर्य ने भी शंकराचार्य को “भगवान तुल्य” बताते हुए सम्मान जताया, जिससे यह चर्चा तेज हुई कि क्या डिप्टी सीएम अलग राजनीतिक लाइन ले रहे हैं।

राजनीतिक माहौल तब और गरमा गया जब आशुतोष पांडे ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर यह दावा किया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को हटाने की साजिश रची जा रही है और एक डिप्टी सीएम शंकराचार्य विवाद को हवा दे रहे हैं। हालांकि उन्होंने किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन यूपी में सिर्फ दो डिप्टी सीएम होने के कारण सियासी अटकलें तेज हो गईं। यहीं से “योगी बनाम अंदरूनी लॉबी” वाला नैरेटिव मजबूत होता दिखा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि हालिया सर्वेक्षणों में योगी आदित्यनाथ की राष्ट्रीय लोकप्रियता बढ़ने और उन्हें संभावित प्रधानमंत्री चेहरा बताए जाने के बाद सत्ता संतुलन की राजनीति तेज हुई है। कुछ सूत्रों के अनुसार, तीसरे डिप्टी सीएम की चर्चा भी इसी रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है — ताकि निर्णय प्रक्रिया सामूहिक बने और मुख्यमंत्री की राजनीतिक शक्ति सीमित हो। इतिहास गवाह है कि जब-जब यूपी बीजेपी में तनाव बढ़ा, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने मध्यस्थ की भूमिका निभाई। मोहन भागवत का लगातार दूसरा लखनऊ दौरा संकेत देता है कि मामला साधारण राजनीतिक असहमति से आगे बढ़ चुका है। संभावना जताई जा रही है कि उनकी मुलाकात योगी आदित्यनाथ, पंकज चौधरी, दोनों डिप्टी सीएम और वरिष्ठ मंत्रियों से हो सकती है। उद्देश्य साफ माना जा रहा है — 2027 से पहले संगठन और सरकार को एक लाइन पर लाना। अब सवाल उठता है कि क्या यूपी बीजेपी में नेतृत्व की लड़ाई शुरू हो चुकी है? क्या योगी आदित्यनाथ और मजबूत होकर उभरेंगे… या सत्ता संतुलन का नया फार्मूला तैयार किया जा रहा है? फिलहाल इतना तय है — लखनऊ की सियासत शांत दिख रही है, लेकिन अंदर से सत्ता का समीकरण तेजी से बदल रहा है… और मोहन भागवत का दौरा उसी बदलाव की सबसे बड़ी कुंजी माना जा रहा है।

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