प्रयागराज का वो ब्राह्मण परिवार, जिसके नाम से पिछले तीन दशक से सत्ता थर्राती रही है। कहा जाता है कि इस परिवार की मर्जी के बिना प्रयागराज और आसपास के जिलों में न पत्ता हिलता है, न राजनीतिक फैसला चलता है। एक दौर ऐसा भी था जब भारतीय जनता पार्टी के बड़े-बड़े नेता खुद इस परिवार की चौखट पर पहुंचते थे—और वहीं तय होता था कि आगे राजनीति कैसे चलेगी। हम बात कर रहे हैं प्रयागराज के करवरिया परिवार की—जिसका दबदबा सिर्फ राजनीति तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सत्ता, संगठन और रणनीति तीनों पर इसकी पकड़ मानी जाती रही है। प्रयागराज, कौशांबी, फतेहपुर और आसपास के जिलों में करवरिया नाम आते ही लोग बिना सवाल किए समझ जाते हैं कि बात किस ताकत की हो रही है।
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बीते दिनों करवरिया परिवार एक बार फिर सुर्खियों में आया, जब परिवार की बेटी की शादी प्रयागराज में हुई। यह शादी महज पारिवारिक कार्यक्रम नहीं थी, बल्कि इसे सियासी गलियारों में शक्ति प्रदर्शन के तौर पर देखा गया। दावा किया गया कि इस शादी में तीस से चालीस हजार लोग शामिल होंगे और भारतीय जनता पार्टी के कई बड़े चेहरे इसमें शिरकत करेंगे। चर्चा थी कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, बृजेश पाठक समेत बीजेपी के कई दिग्गज नेता इस समारोह में नजर आएंगे। वजह साफ थी—करवरिया परिवार का रिश्ता मुरली मनोहर जोशी से लेकर बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व तक रहा है और लंबे समय तक यह परिवार पार्टी का मजबूत स्तंभ माना जाता रहा है। लेकिन जब यह बड़े चेहरे शादी में नजर नहीं आए, तो सवालों का दौर शुरू हो गया। और यहीं से कहानी ने ऐसा मोड़ लिया, जिसने पूरी उत्तर प्रदेश की राजनीति में हलचल पैदा कर दी। एक मीडिया पॉडकास्ट के दौरान प्रयागराज के पूर्व विधायक और बाहुबली नेता उदयभान करवरिया से जब इस बारे में सवाल पूछा गया कि जिन बड़े नेताओं के आने की चर्चा थी, वे क्यों नहीं पहुंचे—तो उन्होंने ऐसा बयान दे दिया, जिसने आग में घी डालने का काम किया।जब उनसे पूछा गया कि आप बड़े नेता किसे मानते हैं, और उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य का नाम लिया गया, तो उदयभान करवरिया ने साफ कहा—“आप मानते होंगे, मैं उन्हें बड़ा नेता नहीं मानता।”बस, यही एक पंक्ति उत्तर प्रदेश की राजनीति में भूचाल लाने के लिए काफी थी। इस बयान के बाद सवाल उठने लगे कि आखिर करवरिया परिवार इतना खुलकर केशव प्रसाद मौर्य को क्यों नकार रहा है। खास बात यह है कि उदयभान करवरिया और केशव प्रसाद मौर्य, दोनों ही कौशांबी और प्रयागराज मंडल की जमीन से जुड़े हैं और ब्राह्मण राजनीति में प्रभाव रखते हैं। लेकिन उदयभान करवरिया को मुरली मनोहर जोशी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का बेहद करीबी माना जाता है। ऐसे में सियासी गलियारों में कयास लगाए जा रहे हैं कि क्या यह बयान सिर्फ नाराजगी है या फिर 2027 के चुनाव से पहले शक्ति संतुलन बदलने की कवायद।

इस पूरे घटनाक्रम का एक और बड़ा पहलू है—उदयभान करवरिया की हालिया रिहाई। 1996 में विधायक जवाहर पंडित की हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा पाने वाले उदयभान करवरिया करीब नौ साल जेल में रह चुके थे। अच्छे आचरण का हवाला देते हुए योगी सरकार ने उनकी रिहाई का फैसला किया, जिस पर राज्यपाल ने भी मुहर लगाई। जेल से बाहर आते ही करवरिया परिवार की सियासी सक्रियता तेज हो गई। माना जा रहा है कि प्रयागराज मंडल में इससे बीजेपी को जहां एक तरफ ब्राह्मण वोट बैंक में मजबूती मिली है, वहीं सत्ता के भीतर वर्चस्व की लड़ाई भी तेज हो गई है। कुल मिलाकर, करवरिया परिवार का यह बयान और घटनाक्रम सिर्फ एक शादी या एक पॉडकास्ट तक सीमित नहीं है। यह संकेत है उस सियासी टकराव का, जो अब सरकार और संगठन के भीतर साफ नजर आने लगा है। प्रयागराज से निकली यह चिंगारी आने वाले दिनों में लखनऊ तक कितनी बड़ी आग बनती है—इस पर अब पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति की नजर टिकी हुई है।







