म्यांमार इस समय भीषण गृहयुद्ध से गुजर रहा है। 10 दिसंबर की रात राखाइन प्रांत के एक अस्पताल पर एयर-स्ट्राइक में 30 लोगों की मौत हो गई और 70 से ज्यादा घायल हुए। माना जा रहा है कि अस्पताल में विद्रोही संगठन अराकन आर्मी के सदस्य मौजूद थे। सेना या सरकार की ओर से अब तक इस हमले पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।
2021 में तख्तापलट के बाद शुरू हुआ संघर्ष
1 फरवरी 2021 को म्यांमार सेना ने चुनी हुई सरकार को हटाकर सत्ता अपने हाथ में ले ली। आंग सान सू ची की पार्टी ने चुनाव जीता था, लेकिन सेना ने धांधली का आरोप लगाकर शासन अपने हाथ में ले लिया।इसके बाद देशभर में विरोध हुआ और सेना ने प्रदर्शनकारियों पर कड़ा दमन किया।विरोधियों ने पीपुल्स डिफेंस फोर्स (PDF) बनाई और कई जातीय सशस्त्र संगठन पहले से ही सेना के खिलाफ लड़ रहे हैं।
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विद्रोहियों का आधे देश पर कब्जा
2024 तक विद्रोहियों का लगभग 40–50% क्षेत्र पर नियंत्रण था। 2025 में सेना ने कई इलाकों में फिर से कब्ज़ा करने का अभियान शुरू किया है। अप्रैल में सेना ने TNLA से एक बड़ा शहर वापस छीन लिया।हालांकि बड़े शहर जैसे यांगून और नायपीडॉ अभी भी सेना के नियंत्रण में हैं।
आम नागरिकों पर बढ़ते हमले
सेना पर लगातार आरोप है कि वह नागरिकों को निशाना बना रही है—
- सितंबर 2025: राखाइन में स्कूल पर हमला, 22 बच्चे मरे
- अक्टूबर 2025: बौद्ध उत्सव में हमला, 32–40 मौतें
- कई अस्पतालों और गांवों पर भी हवाई हमले हुए
खनिज संपदा बनी संघर्ष की असली जड़
म्यांमार दुनिया की सबसे दुर्लभ रेयर अर्थ मिनरल्स का बड़ा भंडार रखता है। उत्तरी सीमा पर दुनिया के तीसरे सबसे बड़े रेयर अर्थ डिपॉजिट हैं, जिसमें डिस्प्रोसियम शामिल है—जो इलेक्ट्रिक कार, एडवांस हथियार और हाई-टेक गैजेट्स बनाने में सबसे जरूरी है।इसी खनिज संपदा पर कंट्रोल पाने के लिए बड़ी शक्तियां म्यांमार पर दबाव बना रही हैं और यही संघर्ष को और खतरनाक बना रहा है।







