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उत्तर प्रदेश के जालौन जनपद में बुधवार को उस समय सियासी सरगर्मी बढ़ गई जब कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के समर्थन में प्रदर्शन करते हुए कलेक्ट्रेट का घेराव किया।
यह प्रदर्शन उरई स्थित कलेक्ट्रेट परिसर में किया गया, जहां बड़ी संख्या में कार्यकर्ता एकत्र हुए और मामले की निष्पक्ष एवं पारदर्शी जांच की मांग उठाई।
कांग्रेस जिलाध्यक्ष अरविंद सिंह सेंगर के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने सिटी मजिस्ट्रेट सुनील कुमार के माध्यम से प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में कहा गया कि शंकराचार्य के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी से देशभर के श्रद्धालुओं और आम नागरिकों में चिंता और असंतोष व्याप्त है।
प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि:
- पूरे प्रकरण की स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कराई जाए।
- जांच का उद्देश्य सत्य को सामने लाना और न्याय सुनिश्चित करना हो।
- एफआईआर दर्ज कराने वाले व्यक्तियों की पृष्ठभूमि और संभावित उद्देश्यों की भी गहन जांच की जाए।
कांग्रेस नेताओं का कहना था कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में किसी भी धार्मिक गुरु के खिलाफ कार्रवाई पूरी तरह विधिसम्मत और पारदर्शी होनी चाहिए, ताकि समाज में शांति और सौहार्द बना रहे।
प्रदर्शन में चौधरी श्याम सुंदर, राजेश प्रजापति, कुंवर सिंह कुशवाहा, दुलीचंद विश्वकर्मा, मुन्ना खान, हीराचंद हौसला, मुख्तार, सुमित सम्राट, देवेंद्र, बाबू सिंह और आशीष सिंह बुंदेला सहित कई वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ता मौजूद रहे।
अरविंद सिंह सेंगर, जिलाध्यक्ष कांग्रेस बयान

अरविंद सिंह सेंगर ने कहा कि शंकराचार्य के खिलाफ दर्ज मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि बिना पारदर्शी जांच के की गई कार्रवाई से समाज में भ्रम और असंतोष की स्थिति उत्पन्न हो सकती है, इसलिए सरकार को तत्काल हस्तक्षेप कर सत्य को सामने लाना चाहिए।







