द्रौपदी मुर्मू के शनिवार को हुए पश्चिम बंगाल दौरे को लेकर विवाद शुरू हो गया है। राष्ट्रपति ने कहा कि उनके दौरे के दौरान तय प्रोटोकॉल का सही तरीके से पालन नहीं हुआ और उनके स्वागत के लिए मुख्यमंत्री या कोई मंत्री मौजूद नहीं था।
इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यह स्थिति दुर्भाग्यपूर्ण है। ममता बनर्जी ने कहा कि वह राष्ट्रपति का बहुत सम्मान करती हैं, लेकिन उनके अनुसार राष्ट्रपति को राजनीति से दूर रहना चाहिए।
राष्ट्रपति पर लगाए राजनीतिक आरोप
ममता बनर्जी ने कहा कि राष्ट्रपति को चुनाव के समय किसी राजनीतिक एजेंडे में नहीं पड़ना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि आदिवासी समुदाय से जुड़े कुछ मुद्दों, जैसे वोटर लिस्ट से नाम हटाने के मामले पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए।
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कार्यक्रम के आयोजन पर भी उठे सवाल
मुख्यमंत्री ने राष्ट्रपति के उस आरोप पर भी जवाब दिया जिसमें कहा गया था कि कार्यक्रम में संथाल समुदाय के लोगों को आने का मौका नहीं मिला। ममता बनर्जी ने कहा कि उस कार्यक्रम के आयोजन में राज्य सरकार की कोई भूमिका नहीं थी और उन्हें केवल दौरे की जानकारी दी गई थी।
उन्होंने बताया कि राष्ट्रपति को एक कॉन्फ्रेंस के लिए इंटरनेशनल संथाल काउंसिल नाम के एक निजी संगठन ने आमंत्रित किया था। सुरक्षा समीक्षा के दौरान जिला प्रशासन ने आयोजकों को बताया था कि कार्यक्रम के लिए उनके पास पर्याप्त संसाधन नहीं हैं।
स्वागत के लिए अधिकारी मौजूद थे
ममता बनर्जी ने कहा कि राष्ट्रपति के स्वागत के लिए सिलीगुड़ी म्युनिसिपल कॉरपोरेशन के मेयर, दार्जिलिंग के डीएम और सिलीगुड़ी पुलिस कमिश्नरेट के अधिकारी मौजूद थे।
मुख्यमंत्री के अनुसार, 5 मार्च को राष्ट्रपति सचिवालय की टीम ने भी कार्यक्रम स्थल का दौरा किया था और उसी समय साफ हो गया था कि कार्यक्रम के लिए पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं। इसके बावजूद कार्यक्रम आयोजित किया गया।
ममता बनर्जी ने यह भी सवाल उठाया कि अन्य राज्यों में आदिवासियों के खिलाफ हो रही घटनाओं पर भी चर्चा होनी चाहिए।







