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संस्कृति सिर्फ परंपरा नहीं, पहचान है: उत्तराखंड संस्कृति बोर्ड की अध्यक्ष मधु भट्ट से विशेष बातचीत

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संस्कृति सिर्फ परंपरा नहीं, पहचान है: उत्तराखंड संस्कृति बोर्ड की अध्यक्ष मधु भट्ट से विशेष बातचीत

UCC के 1 वर्ष पूरे होने पर प्रदेश सरकार ने आयोजित की कार्यशाला, यह जो भ्रम फैलाने का कार्य विपक्ष ने किया था, विपक्ष का काम हमेशा से ही भ्रम फैलाने का है। समान नागरिक संहिता कानून कोई नई बात नहीं है, बल्कि इसका वर्णन भारत के संविधान में सदैव से ही है। समान नागरिक संहिता सभी धर्म, जाति के नागरिकों के लिए समानता की बात करती है, तथा समान नागरिक संहिता के अंतर्गत सभी नागरिकों को सामान्य रूप से देखा जाना चाहिए। आपको बता दें, कि समान नागरिक संहिता सभी नागरिकों को समानता से रखने की बात करती है।

बाहरी देशों में भी है सामान नागरिक संहिता-

उत्तराखंड की संस्कृति बोर्ड की अध्यक्ष मधु भट्ट से बातचीत के दौरान, उन्होंने यह भी कहा कि समान नागरिक संहिता की अवधारणा मुस्लिम देशों में भी है, जिसके अंतर्गत सभी महिलाओं की सुरक्षा का विशेष ध्यान रखा जाता है, इसके साथ ही, महिलाओं की अस्मिता के लिए, महिलाओं की सुरक्षा के लिए, विवाह की पवित्र संस्था से जुड़े हर प्रकार से सुरक्षा मिले, संपत्ति तय हो।

उत्तराखंड के विस्तार में-

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेश की जनता से जो वादा किया था, ‘कि जब वे मुख्यमंत्री बनेंगे तब, समान नागरिक संहिता लागू करेंगे। आज उन्होंने इस वादे पर पूरी तरह से मोहर लगा दी है। आज हम लोग समान नागरिक संहिता के एक वर्ष पूरे होने के अवसर पर, विशेष आयोजन प्रस्तुत कर रहे हैं। इससे सभी को न्याय और उनका अधिकार मिलेगा।

इस दौरान हमारे ब्यूरो हेड दीपक पाण्डेय ने उत्तराखंड की संस्कृति बोर्ड की अध्यक्ष मधु भट्ट से खास बातचीत की और उसमें उन्होंने क्या कुछ कहा।

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