लखनऊ। लखनऊ का गोमती नगर थाना एक बार फिर गंभीर सवालों के घेरे में है। नाबालिग बेटी को न्याय दिलाने के लिए थाने के चक्कर काटती रही पीड़िता मां की गुहार तब सुनी गई, जब उसकी बेटी प्रताड़ना से तंग आकर आत्महत्या कर चुकी थी। हैरानी की बात यह है कि मामला दर्ज होने के बावजूद आरोपी आज भी खुलेआम घूम रहा है और पुलिस की कार्रवाई कागजों तक सीमित नजर आ रही है।
नाबालिग पर प्रताड़ना, पुलिस बनी मूकदर्शक
पीड़िता मां का आरोप है कि पंकज यादव लगातार उसकी नाबालिग बेटी को प्रताड़ित कर रहा था। इस संबंध में वह कई बार गोमती नगर थाने पहुंची, लेकिन पुलिस ने शिकायत को गंभीरता से नहीं लिया। पुलिस की अनदेखी का नतीजा यह हुआ कि अगस्त 2025 में नाबालिग ने परेशान होकर आत्महत्या कर ली।

नाबालिग पर प्रताड़ना, पुलिस बनी मूकदर्शक
मामले की गंभीरता यहीं खत्म नहीं होती। नाबालिग की मौत के करीब चार महीने बाद जाकर पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया। इतना समय बीतने के बावजूद अब तक आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है, जिससे पुलिस की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं।
आरोपी बेखौफ, पीड़िता मां टूटी उम्मीदों के साथ
पीड़िता मां का कहना है कि आरोपी खुलेआम घूम रहा है, जबकि वह न्याय की आस में बैठी है। पुलिस की इस लापरवाही से आरोपी के हौसले बुलंद हैं और पीड़ित परिवार खुद को असहाय महसूस कर रहा है।
सीएम योगी से न्याय की गुहार
थक-हारकर पीड़िता मां ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से न्याय की गुहार लगाई है। उसने मांग की है कि गोमती नगर थाने की भूमिका की जांच हो और आरोपी को तत्काल गिरफ्तार कर सख्त सजा दिलाई जाए।
नारी सशक्तिकरण के दावों पर करारा तमाचा
यह मामला उत्तर प्रदेश में नारी सशक्तिकरण के सरकारी दावों पर भी करारा सवाल खड़ा करता है। जब राजधानी में नाबालिग को समय रहते न्याय नहीं मिल पा रहा, तो आम जनता की सुरक्षा को लेकर भरोसा कैसे कायम रहेगा? अब बड़ा सवाल यह है कि गोमती नगर पुलिस कब जागेगी और कब पीड़िता मां को इंसाफ मिलेगा।







