लखनऊ । प्रदेश में वैज्ञानिक जांच और डिजिटल न्याय व्यवस्था को नई रफ्तार देते हुए उत्तर प्रदेश स्टेट इंस्टिट्यूट ऑफ़ फॉरेंसिक साइंस में दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला का शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि अपर मुख्य सचिव (मुख्यमंत्री एवं गृह) संजय प्रसाद रहे, जिन्होंने दीप प्रज्ज्वलन कर आयोजन की शुरुआत की।
इस मौके पर संस्थान परिसर में अत्याधुनिक जिम ‘सिनर्जी’ और इनोवेशन एवं इनक्यूबेशन सेंटर ‘दक्ष’ का भी उद्घाटन किया गया।
न्याय व्यवस्था को डिजिटल और पेपरलेस बनाने पर जोर

मुख्य अतिथि संजय प्रसाद ने कहा कि प्रदेश की न्याय प्रणाली को तकनीक-सक्षम और लगभग पेपरलेस बनाने की दिशा में तेज़ी से काम हो रहा है। पुलिस थानों, जेलों, अस्पतालों और फॉरेंसिक प्रयोगशालाओं को डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से जोड़ा जा रहा है, जिससे जांच और रिपोर्टिंग प्रक्रिया पारदर्शी और त्वरित हो सके।
उन्होंने कहा कि पहले जटिल मामलों में फॉरेंसिक रिपोर्ट आने में वर्षों लग जाते थे, लेकिन अब हर मंडल मुख्यालय पर आधुनिक फॉरेंसिक लैब स्थापित हो चुकी हैं। डीएनए परीक्षण समेत सभी प्रमुख सुविधाएं एक ही परिसर में उपलब्ध कराई गई हैं, जिससे जांच प्रक्रिया में तेजी आई है।
आज की चुनौती एआई बनाम एआई

अपर मुख्य सचिव गृह संजय प्रसाद ने अपने संबोधन में कहा कि वर्तमान दौर में अपराध का स्वरूप बदल चुका है। फिशिंग, डीपफेक, वॉयस क्लोनिंग और डिजिटल वित्तीय धोखाधड़ी जैसे एआई आधारित अपराध नई चुनौतियां पेश कर रहे हैं।
उन्होंने स्पष्ट किया कि “आज की चुनौती एआई बनाम एआई की है” और राज्य सरकार प्रशिक्षित मानव संसाधन, उन्नत तकनीक और सुदृढ़ कानूनी ढांचे के माध्यम से इन चुनौतियों का मुकाबला कर रही है। साइबर अपराधों में उल्लेखनीय वित्तीय रिकवरी का जिक्र करते हुए उन्होंने इसे तकनीक-आधारित पुलिसिंग का परिणाम बताया।
‘सिनर्जी’ और ‘दक्ष’: समग्र विकास की पहल

कार्यक्रम के दौरान छात्र-छात्राओं के शारीरिक स्वास्थ्य के लिए नव-निर्मित जिम ‘सिनर्जी’ तथा स्टार्टअप और नवाचार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से स्थापित ‘दक्ष’ इनोवेशन एवं इनक्यूबेशन सेंटर का उद्घाटन किया गया।
संस्थान के संस्थापक निदेशक डॉ. जी.के. गोस्वामी ने कहा कि पिछले ढाई वर्षों में संस्थान ने उल्लेखनीय प्रगति की है और यह पहल राज्य के जीरो टॉलरेंस अगेंस्ट क्राइम विजन को मजबूत करती है। उन्होंने संस्थान में संचालित पाठ्यक्रमों और छात्रों की उपलब्धियों पर भी प्रकाश डाला।
एआई, साइबर सुरक्षा और कानून पर विशेषज्ञों की चर्चा

कार्यशाला में इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ मैनेजमेंट लखनऊ के निदेशक प्रो. एम.पी. गुप्ता, इंडियन इंस्टीट्यूट आफ इनफॉरमेशन टेक्नोलॉजी लखनऊ के निदेशक प्रो. अरुण मोहन शैरी और डॉ राम मनोहर लोहिया नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो. डॉ. अमर पाल सिंह ने डिजिटल सुरक्षा, एआई और विधिक अनुपालन के समन्वय पर अपने विचार साझा किए। विशेष सत्रों में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों ने एआई के बढ़ते प्रभाव, साइबर सुरक्षा रणनीतियों, जीरो ट्रस्ट आर्किटेक्चर और रोजगार क्षमता पर विस्तार से चर्चा की। वक्ताओं ने इस बात पर बल दिया कि तकनीकी दक्षता के साथ नैतिक मूल्यों और विधिक समझ का समन्वय अनिवार्य है।
कौशल विकास और वैश्विक पहचान की दिशा में कदम

विशिष्ट अतिथियों ने कहा कि साइबर सिक्योरिटी और फॉरेंसिक जैसे क्षेत्रों में मजबूत वर्कफोर्स तैयार करने के लिए सरकारी संस्थानों और उद्योग जगत के बीच साझेदारी आवश्यक है।
बताया गया कि 2020 के बाद शुरू किए गए विभिन्न पाठ्यक्रमों में अब 500 से अधिक छात्र प्रवेश ले चुके हैं और उन्हें शोध व रोजगार के विविध अवसर मिल रहे हैं। UPSIFS में आयोजित यह अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला केवल एक अकादमिक आयोजन नहीं, बल्कि प्रदेश में तकनीक-संचालित न्याय व्यवस्था की दिशा में ठोस पहल का संकेत है। एआई और साइबर सुरक्षा जैसे उभरते क्षेत्रों में कौशल, शोध और नवाचार को बढ़ावा देकर उत्तर प्रदेश वैज्ञानिक जांच और डिजिटल न्याय प्रणाली में नई पहचान गढ़ने की ओर अग्रसर है।







