ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व
- उन्नाव जिले के बक्सर ग्राम में स्थित माँ चण्डिका देवी का मंदिर 51 शक्ति-पीठों में से एक है।
- पुराणों के अनुसार यहीं मेधा ऋषि ने राजा सुरथ और समाधि वैश्य को दुर्गा सप्तशती का उपदेश दिया था।
- महाभारत काल में बलराम ने भी इस पवित्र स्थल पर दर्शन किए थे।
माता सती की कथा से जुड़ा पौराणिक स्थल
- मान्यता है कि माता सती की जंघाएं इसी स्थान पर गिरी थीं।
- यहीं पर चण्डिका और अंबिका के विग्रह स्थापित किए गए, जो आज भी गंगा तट पर विराजमान हैं।
मंदिर में धार्मिक अनुष्ठान और आयोजन
- मंदिर सुबह 4 बजे खुलता है और रात 9 बजे तक दर्शन के लिए खुला रहता है।
- प्रतिदिन तीनों पहर आरती और मां का श्रृंगार होता है।
- पूरे वर्ष मुंडन, कर्ण छेदन संस्कार और रामायण जैसे आयोजन चलते रहते हैं।
नवरात्रि में विशेष महत्व
- नवरात्रि के दिनों में लाखों श्रद्धालु यहां दर्शन करने आते हैं।
- आरती में सम्मिलित होने से भक्तों को विशेष लाभ प्राप्त होता है।
- गंगा की उत्तरमुखी धारा के कारण यह स्थल काशी की तरह पवित्र माना जाता है।
श्रद्धालुओं की आस्था और मान्यता
- माना जाता है कि यहां दर्शन करने से शत्रु भी मित्र बन जाते हैं।
- भक्त को इतना बल और आत्मविश्वास मिलता है कि बड़े से बड़ा कार्य भी सफल हो जाता है।
- यहां आने वाला कोई भी भक्त खाली हाथ नहीं लौटता।
मंदिर की विशेषता और भोग
- मां को शक्कर पागकर खोए की विशेष कुसली का भोग लगाया जाता है।
- मंदिर के पुजारी विजय शंकर तिवारी के अनुसार, माता का आशीर्वाद हमेशा भक्तों पर बना रहता है।







