कांग्रेस नेता Rahul Gandhi की बिहार पर नजर, कांग्रेस को फिर से खड़ा करने की तैयारी एक बार फिर बिहार दौरे पर हैं — यह पिछले तीन महीनों में उनका तीसरा दौरा है। उनकी ये लगातार यात्राएं दिखाती हैं कि कांग्रेस अब बिहार में खुद को मजबूत करने की गंभीर कोशिश में जुटी है, खासकर आने वाले विधानसभा चुनाव को देखते हुए।
Rahul Gandhi की बिहार पर नजर, कांग्रेस को फिर से खड़ा करने की तैयारी इस बार एनएसयूआई द्वारा निकाली गई यात्रा में हिस्सा लेंगे, जिसका नेतृत्व कन्हैया कुमार कर रहे हैं। यात्रा कन्हैया के गृह जिले बेगूसराय से शुरू होगी और इसके बाद राहुल पटना में होने वाली “संविधान बचाओ बैठक” में भी शामिल होंगे।
कांग्रेस इन बैठकों और कार्यक्रमों के जरिए अति पिछड़ा वर्ग (EBC), दलितों और मुस्लिम समुदाय को जोड़ने की कोशिश कर रही है, लेकिन उसका सबसे ज्यादा फोकस EBC वोट बैंक पर है। जातीय जनगणना के अनुसार, EBC बिहार की सबसे बड़ी आबादी वाला सामाजिक वर्ग है — करीब 36%।
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हाल ही में कांग्रेस ने संगठन में बड़ा बदलाव करते हुए दलित नेता राजेश कुमार को प्रदेश अध्यक्ष बनाया है। भूमिहार समुदाय से आने वाले अखिलेश प्रसाद सिंह की जगह ये बदलाव पार्टी के रणनीतिक सोच को दिखाता है। साथ ही कृष्णा अल्लावरु को बिहार का प्रभारी और कन्हैया कुमार को सक्रिय कर कांग्रेस ने युवा और सामाजिक समीकरणों को साधने की कोशिश की है।
बिहार की जनसंख्या में दलित लगभग 15%, पिछड़ा वर्ग 27%, अनुसूचित जाति 19.65%, सवर्ण 15.52% और मुसलमान 17.70% हैं। इन आंकड़ों को ध्यान में रखते हुए कांग्रेस अपनी रणनीति बना रही है।
फिलहाल बिहार में कांग्रेस के पास 3 सांसद और 19 विधायक हैं। इंडिया गठबंधन में कांग्रेस के साथ RJD, CPI, CPM और CPI(ML) हैं, जबकि NDA में BJP, JDU, LJP (रामविलास), HAM और RLSP शामिल हैं।
Rahul Gandhi की बिहार पर नजर, कांग्रेस को फिर से खड़ा करने की तैयारी की यह सक्रियता साफ संकेत देती है कि कांग्रेस अब RJD की छाया से बाहर निकलकर अपने दम पर मैदान में उतरना चाहती है। अब देखने वाली बात होगी कि क्या ये कोशिशें कांग्रेस को बिहार में नई ताकत दिला पाएंगी?







